बुलंदशहर। जिनके अपने नहीं मिलते, उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी जिले के युवा उठा रहे हैं। पिछले 15 वर्षों में राष्ट्र चेतना मिशन से जुड़े युवाओं ने करीब चार हजार अज्ञात शवों का विधि विधान के साथ दाह-संस्कार कराकर गंगा में अस्थि विसर्जन कराया है।
राष्ट्र चेतना मिशन के अध्यक्ष हेमंत सिंह ने बताया कि शुरुआत तब हुई जब पुलिस को शिनाख्त न हो पाने वाले शवों का अंतिम संस्कार कराने में दिक्कतें नजर आईं। उस वक्त लकड़ियों और खर्च की परेशानी के कारण ठीक तरह से अंतिम संस्कार नहीं हो पाते थे। इसी देखरेख के बाद युवाओं ने स्वयं यह जिम्मेदारी ले ली और संस्था बनाकर काम शुरू किया।
संस्था और कार्यकर्ता
राष्ट्र चेतना मिशन में पिंटू गुर्जर, राम अवतार लोधी, देव, लकी, विकास सिंह, रविपाल, सोनू राघव, शुभ पंडित, महेश लोधी, हिमांशु वाल्मिकी, कपिल राणा, न्यू गुप्ता, मयूर अग्रवाल सहित कई लोग जुड़े हुए हैं। मिशन ने जिला पुलिस के साथ तालमेल बनाकर अज्ञात शव मिलने पर उनका पूरा विधि-विधान कराना शुरू कर दिया है।
जिन चार हजार अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार कराया गया है, उनमें से 3500 के परिवारों की अब तक पहचान नहीं हो सकी है। वहीं करीब तीन सौ मामलों में बाद में परिजन पूछताछ कर के पहुंचे और शवों की पहचान हुई।
कोरोना काल में भी मिशन सक्रिय रहा। उस दौरान लोगों के संपर्क से बचने के कारण अंतिम संस्कार के लिए चार कंधे मिलना भी मुश्किल हो रहा था। टीम ने पीपीई किट पहनकर कोरोना काल में शहर के 80 लोगों के शवों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराया।
संस्था के संरक्षक सीए मनीष मांगलिक ने बताया कि मिशन किसी भी संस्था या व्यक्ति से अंतिम संस्कार के लिए कोई पैसा नहीं लेता। पदाधिकारी और कार्यकर्ता आपस में सहयोग कर व्यवस्था करते हैं। अब पुलिस भी अज्ञात शव मिलने पर सीधे मिशन से संपर्क कराती है।
इस पहल से उन लोगों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार मिल रहा है जिनके अपने नहीं होते। आगे भी मिशन की टीम ऐसे मामलों में पुलिस और स्थानीय प्रशासन से समन्वय बनाए रखेगी।
स्रोत: अमर उजाला

