पीडीडीयू नगर। जिले के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों को रोशन करने के लिए कुल करीब 25.5 लाख रुपये खर्च कर 17 हाईमास्ट लाइटें लगवाई गई थीं, लेकिन ये छह महीने के भीतर ही खराब हो गईं। तीन से चार महीने रोशन रहने के बाद कई हाईमास्ट अब बंद पड़े हैं।
हाईमास्ट लाइटों के खराब होने से शाम होते ही चौराहों और बाजारों में अंधेरा छा जाता है। लोगों ने बताया कि शिकायत करने के बावजूद मरम्मत नहीं कराई जा रही है और खराब लाइटों की मरम्मत किस विभाग के जिम्मे है इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी जा रही।
लगत और स्रोत
आंकड़ों के मुताबिक एक हाईमास्ट लाइट पर औसतन करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च आया था। जिले में ज्यादातर हाईमास्ट लाइटें सांसद और विधायक निधि से लगवाई गई हैं, जबकि कुछ को स्थानीय प्रतिनिधियों ने कराया था।
- नियामताबाद के कूढे खुर्द में दो हाईमास्ट, भाजपा राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह के निधि से, नवंबर 2025 में लगाए गए थे।
- बरहनी चौराहा और ककरैत तिराहा, तत्कालीन भाजपा सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने लगवाईं।
- अमड़ा चौराहा, 2022 में भाजपा सांसद डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने हाईमास्ट लगवाई थीं।
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरहनी, सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने आठ महीने पहले हाईमास्ट लगवाई थीं, जो छह महीने से खराब है।
- इलिया, ब्लॉक प्रमुख गीता देवी ने एक साल पहले 18 खंभों पर हाईमास्ट लगवाई थीं; इनमें 10 खराब हो चुकी हैं।
- टांडाकला चौराहा, सपा विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव की ओर से तीन साल पहले लगवाई गई हाईमास्टें छह महीने से खराब हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लाइट लगने के बाद नियमित रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। खराब लाइटों की वजह से यात्रियों और दुकानदारों को दिक्कतें हो रही हैं और सुरक्षा का संकट भी बना हुआ है।
आगे क्या होगा
लोगों ने अधिकारियों से मरम्मत और रखरखाव के स्पष्ट निर्देश मांगने की बात कही है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग या जिन निधियों से लाइटें लगवाई गईं, वे मरम्मत कराती हैं या नहीं।
स्रोत: अमर उजाला

