नई दिल्ली। हाल की रिपोर्टों में दुनिया की दो बड़ी आबादी वाले देशों, चीन और भारत, में शादी को लेकर अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक समस्याएं दिख रही हैं। चीन में दुल्हन के लिए लाखों रुपये के बराबर ‘ब्राइड प्राइस’ और महंगे मकान कई युवा पुरुषों को शादी से दूर कर रहे हैं, जबकि भारत में दहेज की कुप्रथा के कारण हर साल हजारों महिलाओं की मौतें होती हैं।
चीन में कुछ प्रांतों में ब्राइड प्राइस दो लाख युआन या उससे अधिक तक पहुंच जाती है। शोध बताते हैं कि विवाह से पहले घर खरीदना, आर्थिक स्थिरता हासिल करना और ब्राइड प्राइस देना कई युवाओं के लिए कठिन हो चला है। यह आर्थिक बोझ कई पुरुषों को शादी को त्यागने पर मजबूर कर रहा है।
चीन का सामाजिक परिदृश्य
वन चाइल्ड पॉलिसी के प्रभाव से वहां पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक हो गई है। विश्लेषणों में कहा गया है कि 2027 तक विवाह योग्य आयु वर्ग में पुरुषों की संख्या महिलाओं से करोड़ों अधिक हो सकती है। मकाऊ यूनिवर्सिटी के शोधार्थी यिहुआन झांग ने बताया है कि युवा केवल साथी न मिलने की वजह से नहीं, बल्कि शादी का खर्च प्रमुख समस्या मानते हैं।
अंतरनेशन जर्नल इकोनॉमिक मॉडलिंग में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि ग्रामीण चीन में पारंपरिक रूप से लिया जाने वाला अत्यधिक ब्राइड प्राइस शादी और संतान पैदा करने की इच्छा घटा रहा है। यह प्रवृत्ति खासकर 25 से 29 वर्ष आयु वर्ग में साफ दिखाई देती है।
भारत में दहेज और कानूनी चुनौतियां
भारत में 1961 से दहेज निषेध कानून है, मगर दहेज की मांग अब भी जारी है। दहेज न मिलने पर महिलाओं को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के साथ हत्या तक का सामना करना पड़ता है। ओपी जिंदल लॉ कॉलेज के रिसर्च आर्टिकल में कहा गया है कि दहेज विरोधी कानून में कमियां हैं।
रिपोर्ट में चार प्रमुख संरचनात्मक कमियों का जिक्र है। इनमें दहेज की परिभाषा का सीमित तरीके से लागू होना, धारा 304बी की ‘मौत से ठीक पहले’ शर्त और धारा 113बी से जुड़ी साक्ष्य संबंधी समस्याएं शामिल हैं। इन कमियों के कारण कई पीड़ितों को न्याय पाने में दिक्कत होती है।
विश्लेषक कहते हैं कि यह मुद्दा केवल महिलाओं या पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक आर्थिक और सामाजिक ढांचे से जुड़ा हुआ है। नतीजा यह है कि चीन में युवा पुरुष विवाह से दूर हो रहे हैं और भारत में लड़कियों के प्रति हिंसा व दमन की घटनाएं जारी हैं।
स्रोत: NDTV

