लखनऊ। सोशल मीडिया या फोन पर किसी से झगड़ा या बातचीत कभी‑कभी धमकी तक पहुंच जाती है। अगर कोई महिला उसे निजी फोटो, वीडियो, चैट या दूसरी जानकारी सार्वजनिक करने की धमकी दे रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि जरूरी कदम उठाने चाहिये।
सबसे पहले मिलने वाली बातचीत या संदेश तुरंत नहीं मिटाएं। बातचीत के स्क्रीनशॉट लें और उसमें मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट, यूजरनेम, प्रोफाइल लिंक, तारीख और समय जैसी जानकारियाँ दिखाई दें तो उन्हें सुरक्षित रखें। अगर कोई फोटो, वीडियो, ई‑मेल या संदिग्ध लिंक भेजा गया है तो वह भी संजोकर रखें।
सबूत जुटाना और रिपोर्टिंग
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना जरूरी होता है। शिकायत के साथ चैट, स्क्रीनशॉट, संदिग्ध मोबाइल नंबर, वीडियो, तस्वीर और वेब पेज का यूआरएल जैसे सबूत लगाने का विकल्प होता है। प्लेटफार्म पर रिपोर्ट करने से पहले सबूत सुरक्षित रखें और रिपोर्ट में सही तारीख‑समय व पूरा घटनाक्रम दें।
धमकी देने वाले से लंबी बहस करने या तर्कवैमनस्य में पड़ने से बचें। पैसे या किसी दूसरी मांग को पूरा करने से पहले कानूनी सलाह लें। सोशल मीडिया पर संबंधित अकाउंट या पोस्ट को रिपोर्ट भी कर सकते हैं, पर रिपोर्ट करने के बाद भी पुलिस या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना जरूरी है ताकि कार्रवाई संभव हो।
अगर धमकी गंभीर है, निजी सामग्री पहले ही वायरल हो चुकी है या महिला को अपनी सुरक्षा का डर है तो स्थानीय पुलिस से संपर्क करें। आपात स्थिति में 112 पर मदद ली जा सकती है। महिलाओं के लिए 181 और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 भी उपलब्ध हैं।
जल्दी से सबूत सुरक्षित कर शिकायत दर्ज कराने से मामला सही तरीके से सामने आता है और पुलिस अथवा साइबर टीम प्रभावी रूप से कदम उठा सकती है। अपनी गलती समझकर चुप न रहें और जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद लें ताकि आपकी सुरक्षा और निजता बनी रहे।
- आपातकालीन नंबर: 112
- महिला हेल्पलाइन: 181
- साइबर अपराध हेल्पलाइन: 1930
स्रोत: अमर उजाला

