एटा। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी के पीछे स्थित डायलिसिस यूनिट की हालत जर्जर बताई जा रही है। मरीज और तीमारदार शिकायत कर रहे हैं कि इलाज के दौरान छत से प्लास्टर गिरने जैसी घटनाओं से उनकी जान को खतरा है।
शुक्रवार को मरीजों व तीमारदारों ने मरम्मत कराने की मांग लेकर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, सीएमएस और जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र सौंपा। लोगों का कहना है कि यूनिट की इमारत पुरानी है और देखभाल नहीं की जा रही।
डायलिसिस के दौरान सुरक्षा चिंताएं
डायलिसिस प्रक्रिया में तीन से चार घंटे लगते हैं। मरीजों ने बताया कि पूरे समय वे छत से गिरने वाले टुकड़ों के डर में रहते हैं। एक मरीज शुभम दीक्षित ने कहा, “यूनिट की छत से प्लास्टर के टुकड़े गिरते हैं। उपचार के दौरान मरीज खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। सेंटर की जल्द मरम्मत कराई जानी चाहिए।”
तीमारदार राकेश जैन ने भी लापरवाही की बात कही और कहा, “लापरवाही बरती जा रही है। कई बार मांग हुई लेकिन जीर्णोद्धार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। छत से कभी बड़ा हिस्सा गिरा तो मुश्किल हो जाएगी।”
मरीजों ने यह भी बताया कि पिछली गर्मियों में यादव नगर निवासी एक मरीज की डायलिसिस के दौरान छत से सीमेंट का बड़ा टुकड़ा गिर गया था और वह घायल हो गया था। उसके बाद भी मरम्मत का काम नहीं कराया गया।
प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह ने बताया कि डायलिसिस सेंटर की मरम्मत के लिए करीब 25 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उन्होंने कहा, “इसके स्वीकृत होने के बाद मरम्मत कराई जाएगी।”
मरीजों का कहना है कि यूनिट को मेडिकल कॉलेज के नए भवन की छठवीं मंजिल पर शिफ्ट करने की तैयारी है, लेकिन नई जगह तक पहुंचना मुश्किल होगा। इसलिए वे चाहते हैं कि मौजूद इमारत की ही मरम्मत और जीर्णोद्धार करा दिया जाए।
स्रोत: अमर उजाला

