टूंडला। शुक्रवार देर रात से हुई बारिश और तेज हवा ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है और किसानों की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। इस खराब मौसम के कारण कई खेतों में पककर तैयार खड़ी बाजरे की फसल जमीन पर बिछ गई है।
लाइनपार इलाके के गांवों नगला केशों, रसूलाबाद, नगला राजपति और बजहेरा के किसान कल्याण सिंह, दिनेश चंद्र, अरविंद कुमार व कंचन पाल सिंह ने बताया कि वे फसल की कटाई करने से पहले ही बारिश और तेज हवा के चलते बालियां झुक कर जमीन पर आ गईं। प्रभावित किसानों ने फसल बचाने के लिए तत्काल कोई बड़ा काम नहीं कर पाने की बात कही।
फसल को खतरे की आशंका
लतुर्रा के पुष्पेंद्र उपाध्याय, रसूलाबाद के इंद्रपाल सिंह व छिकाऊ के नीरज दीक्षित ने कहा कि जमीन पर बिछी फसल में सिट्टों (बालियों) में कंडो रोग लगने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि नमी से दाने अंकुरित होने और कीड़ों के लगने की संभावना भी बनी है, जिससे पैदावार कम होने और अनाज की गुणवत्ता खराब होने का डर है।
किसानों का कहना है कि पक चुकी फसल का मैदान में पड़ी रहना नुकसानदेह है। कीट और फफूंदी की वजह से सीधे आर्थिक क्षति हो सकती है और आगे मवेशी चारे के रूप में भी उपयोग सीमित हो सकता है।
बाजार और आगे की स्थिति
मौसम के इस मिजाज से स्थानीय बाजारों में भी सन्नाटा देखा गया। व्यापारी और मंडी के लोग फिलहाल इंतजार की स्थिति में हैं और आने वाले दिनों में मौसम साफ होने के बाद ही खेतों की स्थिति का आकलन कर पाएंगे।
किसानों ने प्रशासन से शीघ्र मुआवजे और फसल बचाने के तरीके बताने का अनुरोध किया है, ताकि नुकसान कम से कम किया जा सके। फिलहाल खेतों की स्थिति देखकर ही अगला कदम तय होगा।
स्रोत: अमर उजाला

