गौतमबुद्ध नगर (नोएडा)। ग्रेटर नोएडा के आम्रपाली टेक पार्क के सैकड़ों खरीदार 18 साल के लंबे इंतजार के बाद सड़कों पर उतर आए और जोरदार विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कोर्ट रिसीवर व एनबीसीसी के खिलाफ नारेबाजी की और अपने पजेशन की मांग दो टूक कही।
खरीदारों का आरोप है कि उन्होंने 2008 के आसपास इस कमर्शियल प्रोजेक्ट में अपनी जीवनभर की पूंजी लगाई और पूरा 100% भुगतान किया। उनके पोस्टरों पर लिखे शब्द थे, “18 साल का इंतज़ार, फिर भी कोई सुनवाई नहीं” तथा “हमारी प्रॉपर्टी चाहिए, रिफंड नहीं”। प्रदर्शनकारियों ने यह भी पूछा कि “575 करोड़ रुपये की आमदनी, फिर भी ऑक्शन क्यों?”
क्या-क्या हुआ और पहले क्या वादा किया गया
खरीदारों के मुताबिक बिल्डर ने शुरु में तीन साल में पजेशन और 12 से 13 प्रतिशत अश्योर्ड रिटर्न का वादा किया था। 2016 तक आते-आते अश्योर्ड रिटर्न के चेक बाउंस होने लगे और निर्माण कार्य ठप पड़ गया। बैंक ऑफ बड़ौदा ने आम्रपाली के खिलाफ एनसीएलटी में केस दायर किया, जिसके बाद खरीदारों ने अपने हितों के लिए अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की।
सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट्स पूरा कराने की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी एनबीसीसी को सौंपी थी। खरीदारों का कहना है कि 2018-19 में एनबीसीसी ने साइट पर बोर्ड लगाकर 24 से 36 महीनों में काम पूरा करने का दावा किया था, लेकिन कई साल बीतने के बावजूद यहां एक ईंट तक नहीं रखी गई। साइट पर लगा एनबीसीसी का बोर्ड भी गायब बताया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि वे पजेशन के अलावा किसी तरह के रिफंड या अधूरे सौदे को मंजूर नहीं करेंगे। उनका कहना है कि अब कोर्ट रिसीवर और एनबीसीसी मिलकर प्रोजेक्ट की नीलामी यानी ऑक्शन कराने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे वे रोकना चाहते हैं।
स्थानीय खरीदारों ने आवाज उठाई है कि उन्हें जमीन और इमारत चाहिये, न कि पैसा वापस। अब वे अगला कदम कोर्ट और प्रशासन के खिलाफ चेतावनी दे रहे हैं और आगे की कार्रवाई के लिए संगठित रहने की बात कर रहे हैं।
स्रोत: News18

