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गौतमबुद्ध नगर (नोएडा): स्लीपर बसों में छत तक सामान, ऊंचाई मानक 3.9 मीटर से उल्लंघन

यात्रियों ने बताया कि बसों के अंदर फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे बड़े घरेलू सामान भी रखे जा रहे हैं, जिससे आपातकालीन निकासी मुश्किल हो जाती है।

नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे और दिल्ली के प्रमुख बस पॉइंटों से चलने वाली कुछ स्लीपर बसों में छत तक सामान लादने की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। यात्रियों ने बताया कि बसों के अंदर और बाहर दोनों तरफ सामान इतना भरा रहता है कि आपातकाल में बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है।

यात्रियों का कहना है कि ‘‘भाई जी! एडवांस टिकट तो बुक करवाओ, कितना भी सामान भी लाद लेंगे…।’’ जैसे वाक्य सुनने को मिलते हैं। मुनिरका और अन्य पॉइंटों पर यात्रियों के आने के बाद ड्राइवर सीट के पीछे से लेकर छत तक सामान रखना शुरू हो जाता है। सामान्य बैग के साथ फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे बड़े घरेलू सामान भी बसों में रखे जा रहे हैं।

सुरक्षा मानक और जांच की कमी

नियमों के अनुसार सामान सहित बस की ऊँचाई 3.9 मीटर तक होनी चाहिए, वरना बस सीज की जा सकती है। परंतु यात्रियों और परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार व्यावहारिक तौर पर बसों पर सामान इतना लादा जाता है कि मानकों का पालन नहीं होता। विभाग अक्सर केवल रूट परमिट, पंजीकरण और प्रदूषण के कागजी दस्तावेज ही देखता है।

परिवहन के विभागीय सूत्रों ने कहा कि दिल्ली में रोककर मानकों का पालन कराना मुश्किल है। दूसरे राज्यों में पंजीकृत बसें दिल्ली से यात्रियों को भरकर निकल जाती हैं और गलतियों के बावजूद कई बार बच निकलती हैं। एमवीआई नियमों के विपरीत बदलाव पाए जाने पर मूल परमिट वाले संभागीय कार्यालय को कार्रवाई की सिफारिश करनी चाहिए, पर वह प्रक्रिया सीमित रहती है।

यात्रियों ने साफ कहा कि स्लीपर बसों में निकासी की जगह कम रहती है। मुनिरका से राजस्थान जा रहे मनोज ने बताया कि स्लीपर बस में पहले ही जगह कम होती है, ऐसे में अधिक सामान रखने से परेशानी बढ़ जाती है। रात में किसी हादसे की स्थिति में यात्रियों को बाहर निकलने में दिक्कत हो सकती है।

कश्मीरी गेट और आनंद विहार से चलने वाली बसों के यात्री पैनिक बटन और आपातकालीन निकास के बारे में भी अनजान दिखे। अभिषेक ने कहा कि उन्हें मालूम ही नहीं होता कि बस में पैनिक बटन है या नहीं और यदि है तो वह काम करता भी है या नहीं।

यात्री प्रतिनिधि और सुरक्षा जांच में लगे लोग मांग कर रहे हैं कि यात्रियों की संख्या के साथ-साथ बसों में सामान की मात्रा, सामान रखने के स्थान और आपातकालीन निकासी की क्षमता को भी जांच में शामिल किया जाए। इन सवालों के हल से ही लंबे मार्गों पर चलने वाली बसों में यात्रियों की सुरक्षा बेहतर हो सकेगी।

स्रोत: अमर उजाला

Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।