गोरखपुर। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट, गोरखपुर से उन अधिवक्ताओं की सूची मांग ली है जिन्होंने पंजीकरण के दो साल बाद भी सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) नहीं लिया है। पत्र में कहा गया है कि सूची मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट, गोरखपुर में कुल 11,000 अधिवक्ता पंजीकृत हैं। इनमें से लगभग आधे के पास अभी सीओपी नहीं है, यानी करीब 5,500 वकील सीओपी के बिना पेशेवर वकालत नहीं कर पाएंगे। पत्र की प्रति जिला जज और जिलाधिकारी को भी भेजी गई है।
सीओपी की शर्तें और नवीनीकरण
नए अधिवक्ताओं को पंजीकरण कराने के बाद दो साल के भीतर बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित परीक्षा पास करके सीओपी लेना अनिवार्य है। हर पाँच साल बाद सीओपी का नवीनीकरण कराना होता है और नवीनीकरण आवेदन के साथ पाँच वकालतनामा लगाना जरूरी है। नए वकीलों को सशर्त जारी सीओपी दो साल के बाद समाप्त हो जाती है।
सूची के आधार पर जिनके पास सीओपी नहीं होगी, उन्हें बार काउंसिल द्वारा डीबार किया जा सकता है और वे बार एसोसिएशन की सुविधाओं का लाभ भी नहीं ले पाएंगे। “बिना सीओपी वकालत करना संभव नहीं होगा: मधुसूदन त्रिपाठी, पूर्व चेयरमैन व वर्तमान सदस्य, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश”
बिना सीओपी वाले अधिवक्ताओं को चैंबर‑शेड खाली करने की भी स्थिति बन सकती है क्योंकि सक्रिय अधिवक्ता ही बार की सुविधाओं के पात्र माने जाते हैं। बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि नियम का पालन न होने पर औपचारिक कार्रवाही अमल में लाई जाएगी।
बार एसोसिएशन के मंत्री अनुज अस्थाना ने अधिवक्ताओं से कहा कि सीओपी बनवाने में लापरवाही न बरतें। “ऐसे अधिवक्ताओं को सीओपी बनवाने के लिए गंभीरता से प्रयास करना चाहिए: अनुज अस्थाना, मंत्री, बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट, गोरखपुर”
अब बार एसोसिएशन को जल्द ही उन अधिवक्ताओं की सूची तैयार कर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को भेजनी होगी। जिन वकीलों के पास सीओपी नहीं है, उन्हें समय रहते प्रक्रिया पूरी करवाई जानी चाहिए ताकि वकालत पर असर न पड़े।
स्रोत: अमर उजाला

