गोरखपुर। शहर में हाल के महीनों में जेल से रिहा होने वालों के स्वागत के वीडियो और रील बनाकर सोशल मीडिया पर डालने का चलन बढ़ गया है। रिहाई के वक्त बंदी के बाहर निकलने, समर्थकों के स्वागत और वाहनों के काफिले तक को कैमरे में कैद कर वायरल किया जा रहा है।
वीडियो में आमतौर पर बैकग्राउंड म्यूजिक और संवाद जोड़कर पोस्ट किया जाता है। लाइक और शेयर से इन रीलों की पहुंच तेज़ी से बढ़ जाती है और कई बार इस तरह की भीड़ पुलिस के लिए चिंता का सबब बनती है।
कई मामलों की जानकारी
25 सितंबर को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में दो छात्र गुटों के विवाद के बाद दर्ज लूट और धमकी के मामले में आरोपी छात्र नेता सतीश प्रजापति को जमानत मिली थी। देर शाम वह जेल से निकला और समर्थकों ने उसका भव्य स्वागत किया; इस स्वागत का वीडियो रील बनाकर वायरल हुआ।
15 सितंबर को भाजपा नेता और पूर्व उपसभापति बृजेश सिंह छोटू को जान से मारने की धमकी देने के आरोप वाले रजत चौधरी की भी रिहाई पर वीडियो पोस्ट हुआ था। रजत के चारों ओर दोस्त और परिचित मौजूद थे और वीडियो पर तेजी से लाइक‑शेयर आए। पुलिस ने रजत को दुराचारी घोषित कर हिस्ट्रीशीटर बनाया है।
यह पहला मामला नहीं है। मई 2026 में जेल से जमानत पर बाहर आए एक आरोपी के स्वागत में समर्थकों ने वाहनों के काफिले के साथ रोड शो निकाला था। वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने आठ युवकों को गिरफ्तार किया था। जुलाई 2024 में पेशी के दौरान कचहरी में बंदी की रील बनाने का मामला भी سامنے आया था और उस समय भी जांच हुई थी।
पुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि अपराधी प्रवृत्ति वाले लोग रिहाई के बाद ऐसे प्रदर्शन कर रहे हैं। “ऐसे लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी”: डॉ. कौस्तुभ, एसएसपी।
स्थानीय लोग बताते हैं कि रिहाई‑वीडियो से माहौल और उग्र हो सकता है और इससे सार्वजनिक शांति प्रभावित होती है। कई लोग सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर तनाव महसूस कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस ने कहा है कि ऐसे मामलों पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ी तो कार्रवाई की जाएगी। लोगों से भी अपील है कि किसी भी वायरल वीडियो को देखकर भावनाओं में बहकर सार्वजनिक व्यवस्था भंग न करें और अगर किसी वीडियो से डर या खतरा नजर आए तो स्थानीय थाने को सूचित करें।
स्रोत: अमर उजाला

