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हाथरस: रेलवे परिसरों में वर्षा जल संचयन से बारिश का पानी जमीन में लौटेगा

आगरा मंडल में 38 संरचनाएं पूरी हो चुकी हैं और कानपुर क्षेत्र में छह संरचनाएं स्थापित की जा चुकी हैं, कई जगह पुराने कुएं व सूखे बोरवेल जोड़े गए।

हाथरस: रेलवे परिसरों में वर्षा जल संचयन से बारिश का पानी जमीन में लौटेगा
फोटो: अमर उजाला

हाथरस। उत्तर मध्य रेलवे ने अलीगढ़ से लेकर आगरा मंडल तक के बड़े-छोटे रेलवे परिसरों में वर्षा जल संचयन की महत्वाकांक्षी योजना आगे बढ़ाई है। इसका उद्देश्य परिसर से बहकर बाहर जाने वाले बरसाती पानी को जमीन में लौटाना है।

आगरा मंडल में 38 संरचनाएं पूरी हो चुकी हैं और आगरा कैंट, आगरा फोर्ट व राजा की मंडी स्टेशनों के सर्विस भवनों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था कर दी गई है। कानपुर क्षेत्र में भी कुल छह संरचनाएं स्थापित हो चुकी हैं जबकि अनवरगंज में दो संरचनाएं काम कर रही हैं और दो अन्य संरचनाएं अगले 10 दिन में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

पुरानी परिसंपत्तियों का दोबारा उपयोग

रेलवे ने नई संरचना बनाने के साथ-साथ प्लेटफॉर्म व परिसर में मौजूद पुराने कुएं और सूखे बोरवेलों को भी रिचार्ज सिस्टम से जोड़ा है। जहां तकनीकी रूप से उपयुक्त पाया गया, वहां पुराने कुएं व सूखे बोरवेलों को रिचार्ज के लिए ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे नई संरचनाओं की जरूरत कम हो रही है और निष्क्रिय परिसंपत्तियों का पुनः उपयोग हो रहा है।

झांसी मंडल में महोबा, पामां, मलासा, आटा, भुआ, मोंठ, चिरगांव, परिछा व झांसी समेत कई स्थानों पर अलग-अलग प्रणालियां विकसित की गई हैं। महोबा में छत से आने वाले पानी को पुराने कुएं तक पहुंचाया गया है जबकि पामां में सूखे बोरवेलों का उपयोग कर रिचार्ज किया जा रहा है। मलासा स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर-1 के पास डीप बोर के निकट हैंडपंप से जुड़े सूखे बोर को जला तारा-टाइप व्यवस्था से रिचार्ज किया जा रहा है।

रेलवे परिसरों में बारिश के पानी को सीधे जमीन में पहुंचाने की बजाय कई स्थानों पर फिल्ट्रेशन और फर्स्ट-फ्लश सिस्टम से गुजारा जा रहा है। इसके बाद पानी को रिचार्ज पिट, सोक पिट या पुराने बोर-कुओं तक पहुंचाया जाता है, ताकि पानी नियंत्रित तरीके से जमीन में समाहित हो और भूजल पुनर्भरण में वृद्धि हो।

“वर्षा जल संचयन के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने से रोकना, सतही बहाव कम करना और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है।” – डॉ. शिवम शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज

स्थानीय स्तर पर यह पहल खेतों और बस्तियों के आसपास भूजल स्तर पर असर दिखा सकती है। रेलवे अगले चरण में और अधिक परिसरों को जोड़ने तथा अधूरे काम जल्द पूरा करने की तैयारी कर रहा है।

स्रोत: अमर उजाला

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Vikas Kumar

Vikas Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।