कालपी। शुक्रवार देर शाम हाईवे पर बेसुध मिले एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के इलाज के लिए एनएचएआई की एंबुलेंस और कालपी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीच करीब आधा घंटे तक कड़वी बहस चली। दोनों पक्षों में जनपद सीमा की उलझन के कारण मरीज को तुरंत भर्ती नहीं कराया गया।
मिली जानकारी के मुताबिक, एनएचएआई की एक एंबुलेंस को सूचना मिली कि कानपुर देहात के चौरा क्षेत्र के पास हाईवे पर एक व्यक्ति बेसुध अवस्था में पड़ा है। एंबुलेंस कर्मी उसे लेकर कालपी सीएचसी पहुंचे। यहां जब अस्पताल कर्मियों को बताया गया कि मरीज कानपुर देहात से लाया गया है तो उन्होंने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया।
सीमांत जिम्मेदारी और असमर्थता
अस्पताल कर्मियों ने तर्क दिया कि कोतवाली पुलिस बताएगी तभी मरीज को भर्ती किया जा सकेगा और अगर उसे आगे रेफर करना पड़ा तो पुलिस की मौजूदगी जरूरी होगी। दूसरी ओर पुलिस ने कहा कि मामला दूसरे जनपद का है इसलिए वे मरीज के साथ जाने में असमर्थ हैं। इससे मरीज आधे घंटे तक स्थिति के फेर में एंबुलेंस में फंसा रहा।
घटना बढ़ने पर एनएचएआई एंबुलेंस कर्मियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारी इंगलेश शर्मा को फोन कर स्थिति बताई। अधिकारी के निर्देश पर मरीज को एंबुलेंस से उतारकर सीएचसी परिसर में छोड़ दिया गया और एंबुलेंस वापस चली गई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि व्यक्ति किसी सड़क हादसे में घायल नहीं था और उसके शरीर पर चोट के निशान भी नहीं थे। उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया। घटना ने आपातकालीन इलाज की उपलब्धता और जनपद सीमाओं के आधार पर विभागीय समन्वय पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश कुमार बरतिया ने कहा, “व्यक्ति को हाईवे की एंबुलेंस लेकर आई थी। पुलिस के न आने से इलाज देरी से हुआ था।” बाद में कालपी सीएचसी में उसका उपचार कर उसे रेफर कर दिया गया।
स्थानीय लोगों और राहगीरों ने कहा कि आपात स्थितियों में सीमाओं के नाम पर मरीज के साथ ऐसी देरी बर्दाश्त के बाहर है। आगे के लिए संबंधित विभागों से बेहतर समन्वय की उम्मीद जताई जा रही है।
स्रोत: अमर उजाला

