कालपी। शनिवार को महेवा सहकारी समिति में 500 बोरी डीएपी खाद आने की जानकारी मिलते ही जिले भर के किसान सुबह से ही समिति पर इकठ्ठा हो गए। पहुंचने पर लंबी कतार बन गई और तनाव की स्थिति बनी रही।
वितरण पर अव्यवस्था
वितरण शुरू होने पर नियम बना कि प्रति किसान अधिकतम दो बोरी ही दी जाएंगी। बावजूद इसके उपलब्धता कम होने के कारण सिर्फ 300 बोरी का ही वितरण किया जा सका। खाद समाप्त होने के बाद सैकड़ों किसान बिना बोरी लिए वापस लौट गए। समिति पर अभी 200 बोरी खाद उपलब्ध बताई जा रही है।
किसानों ने बताया कि वे समय रहते स्टॉक करना चाहते थे ताकि बुवाई के समय बार‑बार समितियों के चक्कर न काटने पड़े। कई किसान दूरदराज के गांवों से भी आए थे और उन्हें आशा थी कि बुवाई से पहले खाद मिल जाएगा।
किसानों का आरोप है कि सरकारी केंद्रों पर अव्यवस्थाओं के कारण उन्हें निजी दुकानों की ओर रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि डीएपी की 50 किलोग्राम बोरी की निर्धारित कीमत करीब 1350 रुपये है, जबकि निजी दुकानों पर यही बोरी करीब 1700 रुपये तक में मिल रही है। कई किसान 350 रुपये अधिक देकर भी खरीदने को मजबूर हैं।
पीसीएफ केंद्र पर भी खाद वितरण नहीं हो पाया। वहां आए किसानों का सत्यापन मशीन की तकनीकी खराबी के कारण नहीं हो सका। इस बारे में पीसीएफ केंद्र प्रभारी ने कहा, “तकनीकी कारणों के चलते किसानों का सत्यापन नहीं हो पाया। इस कारण खाद का वितरण नहीं हो सका है। खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।”
महेवा सहकारी समिति के गोदाम प्रभारी ने बताया, “पुलिस की मौजूदगी में 300 बोरी खाद का वितरण हो पाया। अभी 200 बोरी उपलब्ध हैं।” पुलिस की उपस्थिति में किसानों को दो‑दो बोरी देकर व्यवस्था शांत रखी गई।
अब किसानों को यह देखना होगा कि शेष 200 बोरी का वितरण कब और कैसे होगा। संबंधित अधिकारियों से कहा जा रहा है कि सत्यापन की मशीन ठीक कर जल्द शेष खाद मुहैया कराई जाए।
स्रोत: अमर उजाला

