झांसी। शहर में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर ऑनलाइन चालानों से पुलिस विभाग को अब तक करीब 14 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। यह राजस्व इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) की मदद से चार वर्षों में बने करीब आठ लाख चालानों पर आधारित है।
स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने अब इन चालानों से मिलने वाले राजस्व में आधा हिस्सा मांगा है और यह अनुरोध एसएसपी को भेजे पत्र के जरिए किया गया है। स्मार्ट सिटी का कहना है कि आईसीसीसी के संचालन और रखरखाव पर हर साल करीब 6 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, इसलिए उसे राजस्व में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
आईसीसीसी का खर्च और विस्तार
आईसीसीसी का निर्माण और पांच साल तक रखरखाव के लिए स्मार्ट सिटी ने करीब 192 करोड़ रुपये खर्च किए थे। मौजूदा अनुबंध जून 2026 में समाप्त हुआ था, जिसे बाद में सितंबर तक तीन महीने का विस्तार दिया गया है। स्मार्ट सिटी बताती है कि आगे के संचालन-रखरखाव के लिए मिशन व शासन से रकम अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
एक सूत्र के अनुसार वर्तमान में आईसीसीसी के संचालन व रखरखाव के लिए लगभग 6 करोड़ रुपये सालाना दिए जा रहे हैं। नई निविदा प्रक्रिया में अनुमानित लागत 14 करोड़ रुपये मानकर प्रस्ताव शुरू करने की बात कही जा रही है।
आईसीसीसी वर्ष 2022 में तैयार हुआ था। केंद्र में लगे कैमरे और सेंसर शहर के प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक की निगरानी करते हैं। तेज रफ्तार, रेड लाइट पार करने और अन्य उल्लंघनों की पहचान कर ऑनलाइन चालान जारी किए जाते हैं।
आईसीसीसी में उपलब्ध सुविधाओं में कई प्रकार के कैमरे, सेंसर और सूचना प्रणाली शामिल हैं।
- 100 सीसीटीवी कैमरों की स्थापना
- 6 स्थानों पर स्मार्ट ट्रैफिक सेंसर सिस्टम
- 11 स्थानों पर एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम
- 8-8 स्थानों पर स्पीड और रेड लाइट उल्लंघन पकड़ने की व्यवस्था
- 13-13 स्थानों पर एएनपीआर, पब्लिक एड्रेस और इमरजेंसी कॉल बॉक्स
- 17 स्थानों पर फ्री वाई-फाई और 10 स्थानों पर वेरिएबल मैसेज डिस्प्ले
- 5 स्थानों पर एनवायरनमेंट सेंसर सिस्टम
अगले कदम के रूप में अब पुलिस व स्मार्ट सिटी के बीच राजस्व हिस्सेदारी पर चर्चा संभव है। जनता के लिए इसका मतलब यह होगा कि चालान प्रणाली चलती रहेगी और आईसीसीसी के संचालन के लिए धन आवंटन पर अधिकारियों को निर्णय करना होगा।
स्रोत: अमर उजाला

