झांसी। संत समागम में आए कथा वाचक चिन्मयानंद बापू ने शुक्रवार को ओटीटी और अन्य डिजिटल माध्यमों पर परोसे जा रहे आपत्तिजनक दृश्यों पर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह सामग्री भारतीय समाज और संस्कृति के लिए शर्मनाक है और इस पर रोक लगनी चाहिए।
बापू ने बताया कि युवाओं के मन पर इन दृश्यों का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकारों से कहा कि सेंसर बोर्ड पर शिकंजा कसकर इसकी कार्यप्रणाली को कड़ा किया जाना चाहिए।
सेंसर बोर्ड और सरकारों से मांग
चिन्मयानंद बापू ने संगोष्ठी में बोलते हुए कहा, “सेंसर बोर्ड की नियमावली कहां गई?” और यह भी कहा, “एक तरफ सेंसर बोर्ड को खुली छूट दी जा रही है और दूसरी ओर धर्म को दोष दिया जाता है।” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह राष्ट्र पर हर तरह से नजर रखे।
उन्होंने यह भी कहा, “धर्म के कारण ही भारत में आज भी संस्कार जीवित हैं। धर्म न होता तो भारत कब का लंदन जैसा हो गया होता या इससे भी गर्त में चला गया होता।” बापू ने सेंसर बोर्ड की वर्तमान अनुमति देने वाली प्रवृत्ति से समाज में आपत्तिजनक दृश्यों के चलन बढ़ने का खतरा जताया।
इंटरनेट नियंत्रण और बच्चों की सुरक्षा
चिन्मयानंद बापू ने इंटरनेट के इस्तेमाल की मर्यादा पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हमने इंटरनेट के इस्तेमाल की मर्यादा अभी नहीं सीखी है।” वे यह भी बोले, “यह काम साधु-संतों का नहीं, बल्कि सरकारों का है।”
बापू ने बच्चों को आपत्तिजनक सामग्री से बचाने के लिए चाइल्ड लॉक जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी करने का सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए आयु प्रमाणन की व्यवस्था पर विचार करने की बात कही। मोबाइल और इंटरनेट की खुली पहुंच से बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का उन्होंने हवाला दिया।
गो संरक्षण पर वे बोले कि यह केवल सरकार या संतों की जिम्मेदारी नहीं है और कहा कि “गाय के संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखने की आवश्यकता है।” समागम में आए लोगों ने उनकी बातों पर ध्यान दिया और स्थानीय समाज में इन मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद जताई गई।
स्रोत: अमर उजाला

