झांसी। जिला क्षय रोग विभाग ने टीबी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया तेज कर दी है। शासन से मिली एआई से लैस पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीन से दूरस्थ गांवों में कैंप लगा कर लोगों की मौके पर ही एक्सरे देखने और जांच करने का काम किया जा रहा है।
मशीन एक्सरे लेने के बाद एआई तकनीक से तुरंत विश्लेषण कर देती है और टीबी के संदिग्ध मामलों की पहचान कर लेती है। संदिग्ध पाए जाने पर मौके पर ही बलगम सैंपल लिया जाता है और प्रयोगशाला में भेजकर जांच कराई जाती है।
मशीन और काम करने का तरीका
पोर्टेबल डिजिटल एक्सरे मशीन को ब्रीफकेस में रखकर एक जगह से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। टीम मशीन को लैपटॉप से जोड़ती है और शिविर में आने वालों का एक्सरे उसी जगह पर होता है। एक्सरे में संभावित संकेत मिलने पर व्यक्ति को संदिग्ध श्रेणी में रखा जाता है और तुरंत बलगम सैंपल लिया जाता है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. यूएन सिंह ने बताया कि मशीन से करीब तीन घंटे में 120 से अधिक लोगों की एक्सरे स्क्रीनिंग की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अब लोगों को एक्सरे कराने के लिए सीएचसी या जिला अस्पताल तक जाने की जरूरत नहीं रहती, जिससे जांच और उपचार में लगी देरी कम हुई है।
टीम ने मशीन लेकर ककरबई, मऊरानीपुर, गुरसराय, मोंठ और बामौर के दूरस्थ इलाकों में शिविर लगाए हैं। इन शिविरों में एक्सरे के तुरंत बाद एआई विश्लेषण से संदिग्धों का पता चलता है और बलगम सैंपल लिए जा रहे हैं।
जिला क्षय रोग विभाग के आँकड़ों के अनुसार 1 से 28 सितंबर के बीच एआई बेस्ड मशीन से हुई स्क्रीनिंग के जरिए 470 टीबी मरीजों की पहचान की गई है। जांच के बाद जिनमें टीबी की पुष्टि हुई, उन्हें विभाग की ओर से इलाज शुरू कराया गया।
आगे का कदम
बढ़ती जांच क्षमता से ग्रामीण इलाकों में टीबी का पता जल्दी लग रहा है और समय पर उपचार शुरू हो रहा है। विभाग ने योजनाबद्ध रूप से और इलाकों में कैंप बढ़ाने और संदिग्धों के समुचित फॉलो-अप का भरोसा दिया है।
स्रोत: अमर उजाला

