मऊरानीपुर। मेला जलविहार महोत्सव के दौरान आयोजित श्रीरामचरितमानस व संत सम्मेलन में शुक्रवार को संतों और विद्वानों ने प्रभु भक्ति, धर्म और मानव जीवन के उद्देश्य पर विचार रखे। कार्यक्रम का उद्घाटन पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि आयुष श्रीवास और बैजनाथ तिवारी ने किया।
सभा में श्रीरामचरितमानस का संगीतमय पाठ हुआ और संतों के प्रवचनों से पूरा प्रांगण भक्तिमय बन गया। उपस्थितों ने भक्ति और आत्मिक अनुशासन को जीवन की स्थायी शांति का मार्ग बताया।
प्रवचनों में भावनात्मक अपील
सम्मेलन को संबोधित करते हुए रामजीवन पस्तोर ने कहा, “आज का मानव भौतिकता की चकाचौंध में पूरी तरह उलझकर रह गया है। इस कारण उसे क्षणिक सुख तो मिलता है, परंतु स्थायी शांति नहीं मिलती। यदि जीवन के समस्त दुखों और कष्टों से मुक्ति पानी है, तो परमात्मा की शरण और हरि कथा से जुड़ना ही एकमात्र मार्ग है।”
पं. बृजेश त्रिपाठी ने कहा, “संसार रूपी भवसागर से पार उतरने के लिए केवल भगवान नाम का सहारा ही पर्याप्त है। परमात्मा की सच्ची भक्ति से ही जीव का परम कल्याण संभव है।” सिद्धशरण रिछारिया ने श्रद्धालुओं से अपील की, “यदि मनुष्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों व जीवन मूल्यों को अपने आचरण में ढाल ले तो उसका जीवन स्वतः सुखमय और आनंदित हो जाएगा।”
दीदी नीलम गायत्री ने सम्मेलन में कहा, “श्रीरामचरितमानस जैसा सर्वसमावेशी व जीवन मूल्य सिखाने वाला कोई अन्य ग्रंथ नहीं है। इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए।” उन्होंने समय को मनुष्य का सब से योग्य व कठोर शिक्षक बताते हुए कहा कि समय किसी की भूल को क्षमा नहीं करता।
कार्यक्रम में भगवद्भक्ति के गीत और पाठ ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। संगीतमय पाठ और संतों के प्रवचनों के बाद श्रद्धालुओं ने धर्म-आचरण पर चलने की संकल्पना व्यक्त की।
इस अवसर पर बाबा रामदास ब्रह्मचारी, आशू भारद्वाज, अखिलेश सेठ, आशीष कौशिक, राजेन्द्र रावत, छगन राजपूत, अभिलाषा तिवारी, सुभाष चतुर्वेदी, प्रणव द्विवेदी और सुनील शर्मा सहित कई संत और विद्वान मौजूद रहे।
स्रोत: अमर उजाला

