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झांसी: थानों में सुनवाई कम, एसएसपी कार्यालय में रोज 50-100 शिकायती पत्र पहुंचते

थानों में रोज औसतन 15-20 शिकायतें आती हैं लेकिन रोज एफआईआर दर्ज होने का औसत दो से भी कम है; कई पीड़ितों को एसएसपी से शिकायत करनी पड़ती है।

झांसी: थानों में सुनवाई कम, एसएसपी कार्यालय में रोज 50-100 शिकायती पत्र पहुंचते
फोटो: अमर उजाला

झांसी। शहर के कई थानों में फरियादियों की सुनवाई न होने से पीड़ितों को ऊपर अधिकारियों और कोर्ट तक का सहारा लेना पड़ रहा है। शिकायतें थानों पर जमा हो रही हैं, लेकिन पुलिस अक्सर उनकी आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं कर रही।

जमीनी हालात बताते हैं कि नवाबाद, सीपरी बाजार, प्रेमनगर, कोतवाली और उल्दन समेत थानों में प्रतिदिन औसतन 15-20 शिकायती पत्र आते हैं। पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक किसी थाने में रोजाना एफआईआर दर्ज करने का औसत दो से भी कम है। कई मामलों में प्राथमिकी केवल वरिष्ठ अफसरों की दखलअंदाजी पर दर्ज होती है।

थाना वार दर्ज मामले (सितंबर तक)

27 सितंबर तक थानों में दर्ज मामलों की संख्या इस प्रकार है। यह सूची स्थानीय लोगों की शिकायतों की मात्रा और थानों की कार्यवाही के अंतर को दिखाती है।

  • नवाबाद: 50
  • प्रेमनगर: 27
  • सीपरी बाजार: 34
  • कोतवाली: 22
  • रक्सा: 17
  • बड़ागांव: 13
  • बबीना: 23
  • उल्दन: 10

थानों पर सुनवाई न होने की वजह से एसएसपी और आईजी कार्यालयों में भी रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। एसएसपी कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 50-100 शिकायती पत्र मिलते हैं जिनमें अधिकतर वे लोग होते हैं जो थाने से मायूस होकर ऊपर पहुंचे होते हैं।

कई पीड़ितों के उदाहरण ज्वलंत हैं। प्रेमनगर थाने के पास रहने वाले राजेश साहू ने बताया कि 20 सितंबर को एक रेलकर्मी ने उनकी स्कूटी में टक्कर मारी और उन्हें बुरी तरह पीटा। घटना सीसीटीवी में कैद हुई और उस रात उन्होंने प्रेमनगर थाने में तहरीर दी। चौकी से तीन बार मेडिकल कराया गया, लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई।

थानों की मॉनीटरिंग बढ़ाई गई है। थाने स्तर पर ही शिकायतों को सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं और सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। रोजाना दस बजे से सभी थानों में जनसुनवाई की ऑनलाइन निगरानी भी होती है। “थानों की मॉनीटरिंग बढ़ाई गई है। थाने स्तर पर ही शिकायतों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है। सभी थाना प्रभारियों को भी इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। इनमें जल्द ही सुधार भी नजर आएगा। रोजाना दस बजे से सभी थानों में जनसुनवाई की ऑनलाइन निगरानी भी होती है।” विकास कुमार, एसएसपी

स्थानीय लोग चाहते हैं कि थानों पर त्वरित सुनवाई हो और मामूली विवादों में भी तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। पीड़ितों को घर-बार थाने तक लाने का दबाव न बनाया जाए ताकि शिकायतकर्ता आराम से अपनी बात दर्ज करा सकें।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।