कन्नौज। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रिटायर्ड पोस्टमास्टर नक्षत्र सहाय दुबे (80) की शेष आजीवन कारावास की सजा माफ कर दी है। यह आदेश उस समय जारी हुआ जब वे जिला कारागार में आठ वर्ष से अधिक समय बिता चुके थे।
नक्षत्र सहाय दुबे छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र के कसावा गांव के निवासी हैं और पहले डाक विभाग में पोस्टमास्टर रहे थे। वर्ष 2005 में तालग्राम थाना क्षेत्र के कबीरगंज निवासी मेवाराम यादव ने अपने पुत्र हरीराम यादव की हत्या का मामला दर्ज कराया था, जिसमें नक्षत्र सहाय का भी नामजद था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने 7 जून 2017 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सजा और जेल जीवन
जेल प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार नक्षत्र सहाय ने जेल में आठ वर्ष, दो महीने और 28 दिन बिताए। इस दौरान उनका व्यवहार शांत, सहयोगी और अनुशासित रहा। जेल में उन्होंने भक्ति संबंधी गतिविधियों में हिस्सा लिया और कई खंड काव्य भी रचे।
राजभवन को भेजी गई जेल प्रशासन की उत्तम आचरण रिपोर्ट को देखते हुए राज्यपाल ने मानवीय आधार पर उनकी शेष सजा माफ करने की मंजूरी दी। आदेश के अनुसार रिहाई के लिए दो जमानतें और एक निजी बंध पत्र दाखिल करना अनिवार्य है।
परिवार और गांव की प्रतिक्रिया
नक्षत्र सहाय के भतीजे मृदुल दुबे ने बताया कि जिला प्रशासन से औपचारिकताएं पूरी होते ही उनके ताऊ को रिहा कर दिया जाएगा। परिवार में रिहाई की खबर से खुशी का माहौल बन गया है और बच्चे सालों से बुजुर्ग पिता की प्रतीक्षा कर रहे थे।
कसावा गांव में भी रिहाई की सूचना मिलने पर उत्साह फैल गया। जेल प्रशासन ने कहा है कि संबंधित कागजी औपचारिकताएं पूरी होते ही उन्हें ससम्मान रिहा कर दिया जाएगा।
स्रोत: अमर उजाला

