खड्डा (कुशीनगर)। वाल्मीकिनगर बैराज से सोमवार को इस सीजन का सर्वाधिक 5.435 लाख क्यूसेक पानी गंडक नदी में छोड़ा गया। इसके बाद नदी में डिस्चार्ज में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, लेकिन नदी अभी खतरे के निशान से नीचे नहीं आ पायी है।
डिस्चार्ज के घंटेवार आंकड़े
सोमवार भोर में चार और पांच बजे सर्वाधिक डिस्चार्ज हुआ। छह बजे डिस्चार्ज घटकर 5 लाख 10 हजार 555 क्यूसेक हो गया। सात और आठ बजे यह 4 लाख 97 हजार 200 क्यूसेक रहा। नौ बजे 4 लाख 78 हजार 100 क्यूसेक और दस बजे 4 लाख 70 हजार 500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। 11 बजे 4 लाख 49 हजार 250 क्यूसेक तथा दोपहर 12 और एक बजे 4 लाख 28 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
जलस्तर और तटबंध की निगरानी
डिस्चार्ज बढ़ने की वजह से सोमवार सुबह आठ बजे भैंसहा गेज पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। इसे 96 मीटर के खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर 96.43 मीटर पर दर्ज किया गया। अब जलस्तर में धीरे-धीरे गिरावट शुरू हो गई है, जो स्थानीय लोगों के लिए राहत का संकेत है।
गंडक नदी का डिस्चार्ज घटने से तटबंध किनारे बसे कई गांवों के लोगों को कुछ राहत मिली है। इनमें हनुमानगंज, भैंसहा, भेड़िहारी, मदनपुर सुकरौली और गैनही जंगल जैसे गांव शामिल हैं। नदी का जलस्तर कम होने से इन क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा थोड़ा टला है।
फिर भी क्षेत्रीय तटबंध पर नदी का दबाव बना हुआ है। ठोकर संख्या एक, दो, भैंसहा गेज के पास और बीरभार ठोकर पर नदी का दबाव बरकरार है। 14.400 किलोमीटर लंबे छितौनी तटबंध पर संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी की जा रही है। अभियंता और विभागीय कर्मचारी पूरी तरह चौकस होकर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
आगे क्या होगा
प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संसाधन तैयार रखे हैं और तटबंधों पर पहरे बढ़ाये हुए हैं। स्थानीय लोगों से कहा गया है कि अलर्ट बनाए रखें और आवश्यक होने पर अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
स्रोत: अमर उजाला

