कुशीनगर। नारायणी और गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से जिले में बाढ़ का कहर बढ़ गया है। रविवार को नदी के उफान में कई इलाके जलमग्न हो गए और लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने लगे।
राजस्व और आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि कुल 16 गांव डूब गए हैं और करीब 35,000 आबादी प्रभावित हुई है। नारायणी नदी का पानी कई पार के गांवों में घुस गया है और ग्रामीणों ने छतों पर शरण ली हुई है। महादेवा गांव के लोग सालिकपुर चौक के पास हाईवे किनारे शरण लेने को मजबूर हुए हैं।
जलस्तर और पानी की आवक
वाल्मीकि बैराज से रविवार सुबह 9 बजे 4 लाख 8 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। वहीं, नेपाल के देवघाट से 6 लाख 24 हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित हुआ। इन रिसावों से खुदा क्षेत्र के छह गांवों में गंडक का पानी भर गया। स्थानीय नदियों और नालों का बहाव तेज होने की वजह से पानी आसपास के खेत और मकान तक पहुंच गया है।
प्रभावित इलाके में मवेशियों के लिए चारे का संकट बना हुआ है और ग्रामीणों में दिक्कत बढ़ रही है। प्रशासन और बचाव टीमों ने प्राथमिक राहत कार्य शुरू कर दिए हैं लेकिन रास्ते और संपर्क पथ कटने से राहत सामग्री पहुंचाने में बाधा आ रही है।
NDRF और SDRF की टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं और स्थानांतरित करने का काम जारी है। स्थानीय प्रशासन ने भी चौकियों पर सतर्कता बढ़ा दी है और प्रभावितों के लिए अस्थायी व्यवस्थाओं पर काम चल रहा है।
आगे की कार्रवाई
जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में पैदल और नाव के जरिए सर्वे शुरू करवा दिए हैं। जिन्हें हाईवे पर शरण मिली है, उनके लिए प्राथमिक सहायता और मेडिकल टीमों को रवाना किया जा रहा है। लोगों से अपील की गई है कि प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और जोखिम वाले क्षेत्रों में न लौटें।
स्रोत: अमर उजाला

