पडरौना। दिवानी न्यायालय परिसर स्थित एडीआर भवन में 29 सितंबर को पॉक्सो अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर त्रैमासिक बैठक आयोजित हुई। बैठक में बाल यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ित बच्चों को न्याय, पुनर्वास और आवश्यक सहायता समय पर उपलब्ध कराने पर विचार किया गया।
बैठक में मुख्य रूप से जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पीड़ित बच्चों को मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, चिकित्सकीय और कानूनी सहायता कैसे उपलब्ध कराई जाए, इस पर चर्चा हुई। जिला प्रोबेशन अधिकारी शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि पीड़ितों के चिकित्सकीय खर्च और अन्य राहत के लिए समय पर अंतरिम मुआवजा दिया जाएगा।
क्रियान्वयन और तकनीकी समस्याएं
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव भुवन ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में किसी भी स्तर से लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारियों को हर संभव कदम उठाने चाहिए। बैठक में डीएनए सैंपल के संरक्षण और पर्याप्त फॉरेंसिक लैब की उपलब्धता जैसी व्यावहारिक दिक्कतों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विशेष अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने अदालतों में पॉक्सो मामलों की विचारण प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी और जांच‑प्रक्रिया में जल्दबाजी व संवेदनशीलता के साथ पेश आने की आवश्यकता पर जोर दिया। उप निरीक्षक प्रगति जायसवाल और राजेश कुमार ने पुलिस स्तर पर होनी वाली कार्रवाई और विवेचना के नुस्खे स्पष्ट किए।
एसीएमओ डॉ. आरडी कुशवाहा ने कहा कि पीड़ित बच्चों को तत्काल चिकित्सकीय उपचार के साथ मानसिक आघात से उबारने के लिए नियमित काउंसलिंग की जरूरत है। बैठक में यह तय किया गया कि स्थानीय स्वास्थ्य एवं बाल संरक्षण इकाइयों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा ताकि सहायता समय पर पहुँच सके।
बैठक में डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्ता, बीएसए अनिल कुमार सिंह, धनंजय मणि त्रिपाठी, संदीप कुमार पांडेय, अनिरुद्ध कुशवाहा, रीता यादव, नलिन सिंह और अभिषेक कुमार सिंह आदि भी मौजूद रहे। अगला कदम फॉरेंसिक सुविधाओं का आंकलन और पीड़ितों के लिए सहायता‑प्रक्रियाओं का शीघ्र क्रियान्वयन बताया गया है।
स्रोत: अमर उजाला

