रामकोला। नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के जूनियर हाई स्कूल महुआवा में कक्षा सात की छात्रा नेहा भारती की मौत के बाद भय का माहौल पांच दिन बाद भी बना हुआ है। सोमवार को विद्यालय खुला था, लेकिन 110 में से सिर्फ चार विद्यार्थी ही पढ़ने आए।
विद्यालय में संबद्ध शिक्षक और तीन रसोइया मौजूद थे। बच्चों को वापस स्कूल भेजने के लिए रसोइया व शिक्षक गांव-गांव गए और अभिभावकों को मनाने की कोशिश की, पर अधिकतर परिवारों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने से इंकार कर दिया।
घटना का क्रम और जांच
जूनियर हाईस्कूल महुआवा के रामपुरभाठ गांव के अहीरटोली की 12 वर्षीय नेहा भारती कक्षा सात की छात्रा थी। 23 सितंबर को वह कक्षा में अचानक बेहोश हो गई। उस समय स्कूल का इकलौता शिक्षक योगेंद्र लाल श्रीवास्तव मौजूद नहीं था। सहपाठी छात्रा उसे पहले चौराहे पर लेकर गईं और बाद में परिजन उसे पहले सीएचसी ले गए।
सीएचसी से नेहा को मेडिकल कॉलेज कुशीनगर रेफर करने के दौरान रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिवार ने सड़क पर शव रखकर ढाई घंटे तक प्रदर्शन किया। परिजनों का आरोप है कि गांव के तत्कालीन प्रधान ने कानूनी अड़चन बताकर शव दफना दिया था। विरोध के बाद दो दिन बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव निकाला गया और पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम में हार्ट अटैक से मौत की पुष्टि हुई।
शिक्षक योगेंद्र लाल श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। दूसरे विद्यालय से संबद्ध किए गए आशुतोष त्रिपाठी उस दिन स्कूल में मौजूद रहे। कक्षा सात का छात्र अंशु, कक्षा छह की छात्रा मधु और अंशिका तथा कक्षा आठ का आशीष भी स्कूल आए।
प्रतिदिन का हाल और आगे की प्रक्रिया
विद्यालय के मध्याह्न भोजन में उस दिन रोटी, दूध और केला दिया गया। रसोइया आरती, सहोदरी और फूलमती मौजूद रहीं और बच्चों के साथ स्कूल में तैनात रहीं। अब मामले की जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के बाद ही ग्रामीणों का मन बहल पाने की उम्मीद जताई जा रही है।
अभिभावक और स्कूल प्रशासन के बीच संवाद व आश्वासन देने के बाद अगले दिनों स्कूल में उपस्थिति में धीरे-धीरे सुधार की संभावना है। जिला शिक्षा विभाग द्वारा आगे की जांच और जरूरी कदम उठाए जाने की जानकारी मिल रही है।
स्रोत: अमर उजाला

