लखनऊ। यूपी के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में आज तीन किस्से खास चर्चा में रहे। एक में चहेतों को तरजीह देने से अंदरूनी विभाजन दिखा। दूसरे में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हमलों का दौर है और तीसरे में चुनावी दौर की तैयारी के बीच सरकारी कामकाज में भारी कमाई के किस्से सामने आए।
चहेतों के चक्कर में बंटाधार
भाजपा के अंदर प्रचार-प्रसार और पार्टी व सरकार की ब्रांडिंग संभालने वाले विंग में पद बाँटने को लेकर तेज टकराव चल रहा है। जिन लोगों को पद मिल चुका है, वे पुरानी विरोधी खेप को हटाने में जुटे हुए हैं। इस भूमिका में रहे कुछ सहयोगियों को निकम्मा बताकर नई टीम से बाहर करने की कवायद तेज है। पार्टी के अंदर ऐसा ही आपसी संघर्ष जारी रहा तो चुनावी मौसम में पार्टी की छवि प्रभावित होने की शिकायत उठ रही है।
डिजिटल वार और चुनावी रणनीति
चुनाव घोषित होने में अभी वक्त है, लेकिन दोनों पक्ष पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप सामने आ रहे हैं और समर्थक इसका फायदा उठा रहे हैं। खबरों में यह भी आया है कि एक पक्ष ने नवरात्र में इस डिजिटल वार को विराम देने और सिर्फ सकारात्मक संदेश देने का निर्णय लिया है। अभी यह देखना बाकी है कि दूसरा पक्ष क्या कदम उठाता है।
तीसरे किस्से में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े एक विभाग के कामकाज में बड़ी वसूली की बातें उजागर हुई हैं। कई अहम कार्यों के लिए सरकारी फीस के दोगुने तक रिश्वत ली जा रही है। चर्चा है कि निचले स्तर से लेकर ऊपर तक माल और पैसे पहुंचाने की व्यवस्था है, इसलिए वसूली जोरों पर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे सरकारी सेवा में बाधा और जनता की परेशानियाँ बढ़ती हैं। कर्मचारी और अधिकारी दोनों ही इस व्यवस्था से लाभान्वित दिखते हैं। ग्रामीणों को भी इससे जुड़ी शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं।
अब आगे क्या होगा, यह चुनावी माहौल तय करेगा। पार्टीयों को आंतरिक विवाद नियंत्रण में लाने और डिजिटल विवाद को शांत रखने की चुनौतियाँ हैं। जनता को चाहिए कि वे किसी भी अनियमितता की शिकायत संबंधित विभाग या अधिकारियों से दर्ज कराएँ।
स्रोत: अमर उजाला

