लखनऊ। कांग्रेस नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को लेकर दबाव बना रहे हैं और इस पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। प्रदेश में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ और राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मसले को उठाया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 2 मार्च 2023 के सुप्रीम कोर्ट के अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले के फैसले के बाद दिसंबर 2023 में संसद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 बनाया। उन्होंने बताया कि नए कानून से चयन समिति में बदलाव कर दिया गया।
चयन समिति में बदलाव
कांग्रेस का आरोप है कि पहले चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता विपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे। अब उसी समिति में मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को सदस्य बनाया गया है। कांग्रेस का दावा है कि इसी बदलाव के बाद फरवरी 2025 में ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि लोकसभा नेता विपक्ष राहुल गांधी ने नियुक्ति के समय चयन समिति में हुए बदलाव पर असहमति जताई थी। उनके अनुसार राहुल गांधी की सबसे अहम आपत्ति यह थी कि चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश को हटाया गया था।
कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय दुबे ने कहा कि पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई महत्वपूर्ण मामलों में लिखित आपत्तियां दर्ज की हैं। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने, मतदाता डेटा और आईटी सिस्टम के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने तत्कालीन कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखकर शिकायत की थी कि कुछ फैसलों की जानकारी उन्हें बाद में मिली। पार्टी ने यह संख्या भी बताई कि पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 लिखित आपत्तियां दर्ज की गईं, जिनमें चार आपत्तियां एक ही दिन की थीं।
स्थानीय लोगों और राजनीतिक हलकों में यह मामला बहस का विषय बना हुआ है। जो भी आगे की कार्रवाई होगी, वह केंद्र और चुनाव आयोग के उत्तर देने के तरीके पर निर्भर करेगी। पाठक इस मुद्दे पर आगे की जानकारी के लिए केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग की आधिकारिक सूचनाओं का इंतजार कर सकते हैं।
स्रोत: ABP न्यूज़

