ललितपुर। पारसनाथ जैन मंदिर में दस दिवसीय पर्यूषण पर्व संपन्न हुआ। अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने श्रीजी का अभिषेक कर पुण्यार्जन किया और पूरे कार्यक्रम में शांत माहौल रहा।
समापन के अवसर पर सकल जैन समाज ने अपने तरफ से जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की। यह आयोजन सांगानेर शिक्षण शिविर संस्थान जयपुर के पर्व जैन शास्त्री के निर्देशन में हुआ।
दैनिक विधि और सांस्कृतिक कार्यक्रम
पर्यूषण के प्रत्येक दिन श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, रत्नकरण्ड, श्रावकाचार और पूजन विधान नियमित रूप से संपन्न हुआ। सायंकाल में भक्तामर पाठ किया गया और दशलक्षण के धर्मों का वाचन हुआ।
वाचन में उल्लेखित धर्मों में उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, आकिंचन और ब्रह्मचर्य शामिल थे। रात्रि में तंबोला, प्रश्नोत्तरी और भजन गायन जैसी सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।
समापन कार्यक्रम के दौरान पर्व जैन शास्त्री को शाल और शास्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन में अशोक जैन, कैलाश चंद, संजय जैन मोदी और महिला मंडल की भी उपस्थिति रही।
स्थानीय असर और आगे की योजना
श्रद्धालुओं ने आयोजन को सुव्यवस्थित बताया और कहा कि पर्यूषण ने आत्मनिरीक्षण का अवसर दिया। मंदिर व्यवस्थापन ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों से समुदाय के युवाओं की भागीदारी भी बढ़ी है।
मंदिर प्रबंधक ने आगे आने वाले समय में भी इस प्रकार के आयोजन नियमित रूप से कराने की बात कही ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं बनी रहें।
स्रोत: अमर उजाला

