ललितपुर। शनिवार को बिरधा के एक मैरिज गार्डन में भारतीय किसान यूनियन की किसान महापंचायत हुई। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सभा में सरकार पर आक्रमण करते हुए किसान मुद्दों को लेकर तीन बड़ी मांगें रखीं।
महापंचायत में टिकैत ने कहा कि जिले में खनिज संपदा और बांध होने के बावजूद किसान परेशान हैं। उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड का किसान बैंक और साहूकार दोनों के कर्ज की दोहरी मार झेल रहा है और फसल खराब होने पर बीमा का पैसा नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि जिले में बीमा कंपनियों के कार्यालय न होने को धोखा बताया।
प्रमुख मांगें
टिकैत ने सबसे पहले किसानों के सभी कर्ज तत्काल माफ करने की माँग की। दूसरी मांग में उन्होंने कहा कि दाल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी दी जानी चाहिए और सभा में उन्होंने यह कहते हुए दाल के महत्व पर ज़ोर दिया, “ललितपुर दाल का कटोरा है।” तीसरी मांग बुंदेलखंड में एक जैविक बोर्ड बनाने की रही, ताकि जैविक खेती को बढ़ावा मिले और किसानों को बेहतर बाजार मिले।
टिकैत ने रासायनिक खाद के स्थान पर देसी खाद के उपयोग की सलाह भी दी। महापंचायत में जिलाध्यक्ष रंजीत यादव सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे और टिकैत ने किसानों से एकजुट रहने का आह्वान किया। उनके शब्दों में, “मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।”
स्थानीय किसान बैक-टू-बैक कर्ज और बाजार की अनिश्चितता से परेशान दिखाई दिए। कई किसानों ने कहा कि बीमा भुगतान के अभाव में वे घाटे से उबर नहीं पा रहे हैं और छोटी फसलें भी उनकी आर्थिक हालत बिगाड़ रही हैं।
अब आगे क्या होगा, यह टिकैत और संगठन की रणनीति पर निर्भर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ये मांगें नहीं मानी जातीं, संगठन आंदोलन की स्थिति बनाए रखेगा और ग्रामीण इलाकों में और सभाएं बुलायी जा सकती हैं।
स्रोत: अमर उजाला

