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मऊ: दो दिवसीय कजरी महोत्सव समाप्त, लोक कलाकारों ने दर्शकों को भावविभोर किया

हरिऔध कला केंद्र में आयोजित महोत्सव का उद्देश्य पारंपरिक कजरी गायन की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और स्थानीय कलाकारों को मंच देना था।

मऊ: दो दिवसीय कजरी महोत्सव समाप्त, लोक कलाकारों ने दर्शकों को भावविभोर किया
फोटो: अमर उजाला

मऊ। हरिऔध कला केंद्र में रविवार को दो दिवसीय कजरी महोत्सव का समापन हुआ। इस महोत्सव का आयोजन उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन और हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।

महोत्सव का उद्घाटन विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक, पद्मश्री कजरी गायिका उर्मिला श्रीवास्तव, डॉ. मन्नू यादव ‘कृष्ण’, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गंभीर सिंह और हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. पूनम श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पहली शाम में पारंपरिक स्वर-समृद्धि से कार्यक्रम शुरू हुआ और दर्शक झूम उठे।

मंच पर नामचीन व स्थानीय कलाकार

पहली शाम वाराणसी के कजरी गायक डॉ. मन्नू यादव ‘कृष्ण’ ने कजरी की पारंपरिक मिठास से कार्यक्रम की शुरुआत की। अयोध्या के सत्यांशु पटेल ने अवधी कजरी और लोकगीत प्रस्तुत किये। हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ स्थानीय कलाकार अजय मिश्रा, आलोक मिश्रा, हृदय मिश्रा और कृतिका सिंह ने भी प्रस्तुति दी।

मंच पर खास प्रस्तुति पद्मश्री कजरी गायिका उर्मिला श्रीवास्तव की रही। उन्होंने स्थानीय शैली के गीत जैसे ‘पिया मंगाए दा मेहंदी’, ‘हमरी अटरिया पे आजा रे सांवरिया’ और ‘कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घेरी आइल ननदी…’ से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

महोत्सव की दूसरी शाम में वाराणसी से डॉ. सुचारिता गुप्ता और डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य ने कजरी की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं। आजमगढ़ के कलाकार नीतीश मिश्रा, आदर्श मिश्रा, शीतला मोहन मिश्रा और राहुल मिश्रा ने भी अपनी प्रस्तुतियों से लोक गायन की परंपरा को जीवंत रखा।

एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने कहा, “कजरी केवल एक गीत नहीं, बल्कि आजमगढ़ की माटी की खुशबू और लोक संस्कृति की पहचान है।” उन्होंने महोत्सव का उद्देश्य पारंपरिक कजरी गायन की विरासत नई पीढ़ी तक पहुंचाना और स्थानीय कलाकारों को मंच उपलब्ध कराना बताया।

स्थानीय लोगों ने कार्यक्रम की आयोजन शैली और कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की। आयोजक बता रहे हैं कि इस तरह के कार्यक्रमों को नियमित रूप से कर पारंपरिक कलाओं को बचाए जाने का काम आगे भी जारी रखा जाएगा।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।