मेरठ। ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के बीच क्रिकेट की बॉल भी अब इंटरनेट पर आसानी से मिल जाती है। कई बार बाजार कीमतों से बहुत कम दाम देखकर लोग जल्दबाजी में ऑर्डर कर लेते हैं, लेकिन सस्ता दिखना नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।
मेरठ सूरजकुंड स्पोर्ट्स गुड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज कुमार सिंघल ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई बार वही प्रोडक्ट बाजार के मुकाबले बहुत सस्ते दाम पर दिखते हैं। उन्होंने बताया कि “ऑनलाइन खरीदारी करते समय सिर्फ कम कीमत देखकर सामान ऑर्डर नहीं करना चाहिए.”
स्कैनर और होलोग्राम की जांच
अनुज कुमार सिंघल ने खरीदारों को पैकेट पर दिए गए स्कैनर और होलोग्राम की जांच करने के सुझाव दिए। उनके शब्दों में, “अगर स्कैन करने पर वह स्कैनर कंपनी की मुख्य वेबसाइट पर ले जाता है तो प्रोडक्ट के असली होने की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है.” उन्होंने चेतावनी भी दी कि, “वहीं, अगर स्कैन करने पर कोई दूसरी वेबसाइट खुलती है तो प्रोडक्ट को लेकर सावधान रहने की जरूरत है.”
साथ ही उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित ब्रांड अपने प्रोडक्ट पर होलोग्राम भी देते हैं। “कंपनियां अपने प्रोडक्ट पर होलोग्राम भी देती हैं,” यह बात नकली और असली सामान अलग पहचानने में मदद करती है। यदि होलोग्राम न हो या संदिग्ध लगे तो खरीदने से पहले दोबारा जांच कर लें।
स्थानीय युवाओं ने भी अनुभव साझा किए कि ऑनलाइन खरीदी गई सस्ती गेंद की गुणवत्ता में भारी अंतर आया। कई ने बताया कि इस्तेमाल पर सुर्खियाँ दिखी और गेंद जल्दी खराब हुई। इस वजह से केवल तस्वीर और कीमत देखकर भरोसा न करें।
खरीदने से पहले क्या करें
ऑनलाइन खरीदते समय कंपनी और प्रोडक्ट की पहचान, पैकेट पर स्कैनर व होलोग्राम की सत्यता, और बाजार कीमतों से बहुत कम दाम होने पर सतर्कता जरूरी है। इन कदमों से नकली सामान और ऑनलाइन फ्रॉड से बचा जा सकता है।
स्रोत: News18

