मेरठ। मेरठ के तीरंदाज नीरज चौहान ने एशियन गेम्स में टीम और व्यक्तिगत दोनों स्पर्धाओं में पदक जीतकर शहर का मान बढ़ाया। उन्होंने पुरुष रिकर्व टीम इवेंट में साथी धीरज और यशदीप के साथ खेला और व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया।
मुख्य नतीजे और अंक
टीम इवेंट के अंतिम मुकाबले में भारत को दक्षिण कोरिया से 1-5 से हार का सामना करना पड़ा, जिसके चलते टीम को रजत पदक मिला। व्यक्तिगत रिकर्व में नीरज ने ब्रॉन्ज मेडल के लिए धीरज बोम्मादेवरा को 6-4 से हराया और कांस्य पदक सुनिश्चित किया। एशियन गेम्स के इतिहास में व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी में नीरज दूसरे भारतीय पुरुष बने; इससे पहले 2010 में तरुणदीप राय ने इस स्पर्धा में रजत पदक जीता था।
नीरज की शुरूआत और परिवार
नीरज मेरठ के स्टेडियम के पास रहते हैं। परिवार मूल रूप से गोरखपुर का है। पिता अक्षय 1990 में मेरठ आए थे और तभी से परिवार यहीं बस गया। नीरज को चार साल की उम्र में खेलों की ट्रेनिंग दी गई और स्टेडियम में ही उन्होंने कई खेल आजमाए। बाद में उन्हें तीरंदाजी के लिए सोनभद्र हॉस्टल में दाखिला मिला और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
नीरज ने जूनियर स्तर पर 2018 में और सीनियर नेशनल में 2021 में रजत पदक भी जीते। खेल कोटे से उन्हें आईटीबीपी में नौकरी मिली और वर्तमान में वह आईटीबीपी में हैं तथा दिल्ली में तैनात हैं। उनके दूसरे भाई सुनील भी बॉक्सर हैं और खेल कोटे से पीएसी में तैनात हैं।
प्रशंसा और आगे का रास्ता
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी जितेंद्र यादव ने कहा कि पिता ने कड़ी मेहनत कर नीरज को खेलों में आगे बढ़ाया और नीरज ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। कई कोचों और तीरंदाजी के जानकारों ने नीरज को शुभकामनाएँ दी हैं जिनमें एथलेटिक्स कोच गौरव त्यागी और तीरंदाजी कोच पूजा, ललित पंत, किशोर, नेहा कश्यप, ओमकार सिंह आदि शामिल हैं।
नीरज की सफलता से मेरठ के युवा खिलाड़ियों में उत्साह बढ़ा है। जिले के खेल परिसर और हॉस्टलों में अब और पारदर्शिता व बेहतर तैयारी की माँग उठ रही है ताकि स्थानीय प्रतिभाएँ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिखें। आने वाले टूर्नामेंटों में नीरज की लय और प्रदर्शन पर सबकी निगाहें रहेंगी।
स्रोत: अमर उजाला

