पीलीभीत। जिले के अमृत सरोवरों की प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई 25 सितंबर को जारी पत्र के माध्यम से जिले के सभी कार्यक्रम अधिकारियों व खण्ड विकास अधिकारियों को बताई गई।
जिला कार्यक्रम समन्वयक कार्यालय की ओर से भेजे गए पत्र में बताया गया है कि भारत सरकार के निर्देशानुसार भू-गर्भ जल सुधार के लिए मिशन अमृत सरोवर शुरू किया गया था। इसी योजना के तहत जिले के 76 तालाबों को विकसित कर अमृत सरोवर बनाया गया है और अब इन सरोवरों में कमल लगाने को बढ़ावा दिया जाना है।
आदेश और जिम्मेदारियां
पत्र श्रम रोजगार के उपायुक्त हेमंत यादव की ओर से जारी हुआ है। इसमें सभी कार्यक्रम अधिकारियों और खण्ड विकास अधिकारियों से कहा गया है कि वे ग्राम पंचायत स्तर पर कार्ययोजना तैयार कर अमृत सरोवरों में कमल लगाने एवं पर्यावरण सुधार से जुड़ी अन्य गतिविधियों को लागू कराएं। अधिकारियों को पत्र का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि कभी पीलीभीत की पहचान तालाबों से होती थी, लेकिन अब तालाबों की संख्या और उनकी सुंदरता घट रही है। इसलिए तालाबों के संरक्षण और उनके सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान देने का अनुरोध किया गया है।
इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता और जिला पर्यावरण समिति के सदस्य शिवम कश्यप ने अमृत सरोवरों में कमल लगाने की मांग की थी। उनकी मांग को देखते हुए प्रशासन ने ग्राम पंचायतों को सक्रिय करने का निर्णय लिया है ताकि स्थानीय स्तर पर पौधारोपण और रखरखाव की व्यवस्था हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर तालाबों में कमल लगा दिए गए तो न केवल दृश्य सुंदरता बढ़ेगी बल्कि पानी का संरक्षण भी बेहतर होगा। अगला कदम ग्राम पंचायतों से तैयार कार्ययोजना प्राप्त कर उनसे क्रियान्वयन रिपोर्ट मंगाने का होगा। अधिकारियों ने बताया है कि नियमानुसार कार्रवाई कराने के बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

