पिलीभीत। हजारा क्षेत्र के गांव कबीरगंज के पास पिछले दिनों सक्रिय बाघ की लोकेशन न मिलने पर शनिवार को ट्रैंक्युलाइज अभियान थमा दिया गया है। टीमों ने बाघ का काफी खोजा, लेकिन उसे पकड़ने के लिए निर्धारित समय सीमा समाप्त हो गई।
बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति पखवाड़ा भर पहले मिली थी और 19 सितंबर से इस कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा था। गांव कबीरगंज के गन्ने के खेत के पास मचान बनाकर विशेषज्ञों ने पोज़िशन बनाने की कोशिश की, पर शनिवार शाम तक बाघ का पता नहीं चला।
अभियान की रूपरेखा
खीरी उत्तरी से आए विशेषज्ञ डॉ. दया और डॉ. तल्हा ट्रैंक्युलाइज में लगे रहे। आवश्यकतानुसार हाथी भी मंगवाए गए ताकि हाथियों पर सवार होकर जंगल के किनारे बाघ का पता लगाया जा सके। इसके बावजूद बाघ को नहीं ढूँढा जा सका और ट्रैंक्युलाइज करने की समय सीमा खत्म हो गई।
हजारा क्षेत्र में जंगल के बाहर घूमने वाले इस बाघ ने 28 अगस्त को शांतिनगर के मुंशी प्रसाद पर हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। तब से बाघ की चहल‑कदमी और शिकायतों के बाद कार्रवाई तेज की गई और आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ाई गई थी।
संपूर्णानगर रेंजर ललित कुमार ने बताया कि बाघ की काफी तलाश कराई गई, मगर उसे नहीं मिला। इसलिए अभियान को रोक दिया गया है। हालांकि बाघ की मॉनिटरिंग के लिए इलाके में टीमें बनी रहती हैं और निगरानी जारी रहेगी।
स्थानीय लोगों को गश्त और सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि जो कोई भी संदिग्ध मूवमेंट देखेगा, तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करे। आगे की कार्रवाई स्थिति की नई रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

