पीलीभीत। एशियाई खेलों में भारतीय महिला खिलाड़ियों के बेहतरीन प्रदर्शन ने जिले की महिला खिलाड़ियों में नई ऊर्जा भर दी है। नागोया में मिली सफलता से अब गांधी स्टेडियम में अभ्यास करने वाली युवतियाँ और अधिक मेहनत कर रही हैं।
नागोया में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का स्वर्ण और महिला रिकर्व तीरंदाज़ी टीम का ऐतिहासिक स्वर्ण, साथ ही मुक्केबाज़ी में लवलीना बोरगोहेन की जीत ने स्थानीय खिलाड़ियों को प्रेरणा दी है। गांधी स्टेडियम की महिला खिलाड़ी बोंली, मेहनत से कोई बेटी लहरा सकती है परचम संवाद न्यूज एजेंसीपीलीभीत।
गांधी स्टेडियम में प्रतिक्रिया
स्टेडियम में अलग-अलग खेलों की तैयारी कर रहीं महिला खिलाड़ी कहती हैं कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराते देख उनका मनोबल और बढ़ता है। अभ्यास पर आने वाली युवा खिलाड़ी अंकिता ने कहा, “मैदान पर पसीना बहाने वाली हर बेटी किसी दिन देश का नाम रोशन कर सकती है। एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की जीत देखकर अभ्यास के दौरान हमारा आत्मविश्वास और बढ़ता है।”
दूसरी खिलाड़ी आलिया ने कहा, “परिवार का सहयोग और लगातार मेहनत खिलाड़ी की सबसे बड़ी ताकत है। लड़कियों को खेल को सिर्फ शौक नहीं, बल्कि अपना लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।” करिश्मा सोनकर ने भी अपनी बात रखते हुए कहा, “जब टीवी पर भारतीय महिला खिलाड़ी पदक जीतकर तिरंगा लहराती हैं तो लगता है कि हम भी मेहनत करें तो उस मुकाम तक पहुंच सकते हैं। हार से घबराने के बजाय उससे सीखना जरूरी है।”
कोच और स्थानीय खेल अधिकारी भी खिलाड़ियों के उत्साह को बढ़ाने के लिए उपलब्ध संसाधनों में सुधार करने पर विचार कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि युवा खिलाड़ी नियमित प्रशिक्षण, फिटनेस और मानसिक तैयारी पर ध्यान दें।
स्थानीय परिवारों और स्कूलों से भी समर्थन बढ़ाने की अपील की जा रही है ताकि अधिक लड़कियाँ खेलों में शामिल हो सकें। गांधी स्टेडियम में चल रही पहलों से युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और प्रतियोगिता के अवसर मिलने की उम्मीद है।
आने वाले समय में स्थानीय टूर्नामेंट और अभ्यासशिविर आयोजित करने की योजना है, जिससे खिलाड़ियों को मुकाबला अनुभव मिल सके और वे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार हो सकें।
स्रोत: अमर उजाला

