सतांव। अटौरा बुजुर्ग विद्युत उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के विरोध में किसानों ने सोमवार को उपकेंद्र पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में किसानों ने पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं के खिलाफ नारेबाजी की और समस्या के स्थायी समाधान की मांग रखी।
किसानों ने बताया कि उपकेंद्र से जुड़े गांवों में बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली बंद कर दी जाती है और रात में भी अघोषित कटौती होती है। भारतीय किसान विकास एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष नीरज पटेल के साथ आदित्य सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह, शीतला प्रसाद, महेंद्र कुमार, सुजीत कुमार, अजय सिंह, अर्जुन, सतीश कुमार, शैलेंद्र कुमार, विजय बहादुर, कालिका प्रसाद और राजू भी मौजूद रहे।
किसानों की समस्याएँ
किसानों ने बताया कि इस समय धान की फसल में बाली निकलने का समय है और फसल को पानी की सबसे अधिक जरूरत होती है। बिजली न मिलने से सिंचाई नहीं हो पा रही है। दो दिन पहले हुई बारिश से कुछ राहत मिली, लेकिन कटौती की समस्या जारी रही।
किसानों ने यह भी कहा कि उपकेंद्र का सीयूजी नंबर हमेशा बंद रहता है और फ्यूज उड़ने तथा गांवों में ढीले तारों के कारण भी आपूर्ति प्रभावित रहती है। शाम को कटौती होने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कामकाज और बुजुर्गों को परेशानी होती है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जल्द अघोषित कटौती बंद नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
इस बीच उपखंड अधिकारी पीएस राणा धरने में आए किसानों की समस्याओं का ज्ञापन लेकर गए और समाधान का भरोसा दिया। अधिकारियों ने मामला देखने और तत्काल सुधार करने की बात कही।
बिजली बहाली और आगे का कदम
पिछले दिनों हुई बारिश के कारण कई जगह पेड़ गिरने और तार टूटने से बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। कभी 33 केवी तो कभी पाहो, सतांव, देवगांव, मेरुई, कालूपुर, निहस्था और विश्वबैंक फीडर में फॉल्ट आने से व्यवस्था चरमराई थी। कर्मचारियों की कड़ी मेहनत के बाद फॉल्ट ठीक किए गए और रविवार सुबह 11 बजे बिजली आपूर्ति सामान्य हो गई।
किसान प्रशासन और बिजली विभाग से अपेक्षा रखते हैं कि फीडर और तारों की मरम्मत कर दी जाएगी और अघोषित कटौती पर रोक लगाई जाएगी। अगर समस्या बनी रही तो वे आगे के कदम के रूप में जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन करने की बात दोहराते रहे।
स्रोत: अमर उजाला

