लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मिलन का संदेश दिया और बागी विधायकों को लौटने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव का समय मिलन का समय होता है और कड़वी बातें भुलाकर साथ आने की पेशकश की।
अब 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान के पीछे सिर्फ नंबर गेम नहीं रहा। सपा ने दो उम्मीदवारों के नाम पहले ही घोषित कर दिए हैं और तीसरी सीट के लिए जरूरी वोट जुटाने में लगी है। चुनाव आयोग ने नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर तय कर दी है।
मतगणना का गणित
एक राज्यसभा सीट के लिए विधानसभा में 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है। सपा के पास कांग्रेस के दो विधायकों के समर्थन सहित करीब 103 वोट हैं। दोनों घोषित उम्मीदवारों के लिए जरूरी 74 वोट का इंतजाम हो गया है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के लिए 37 वोट और चाहिए।
पार्टी को मौजूदा संख्या से करीब 10 अतिरिक्त वोट जुटाने हैं। इसलिए सपा का फोकस उन विधायकों पर है जो अब एनडीए में हैं, पर जिनके पुराने रिश्ते या रुख स्पष्ट नहीं हैं।
अखिलेश इन दिनों विधायकों को मनाने की कवायद में तेज दिख रहे हैं। कल उनकी सुभासपा के विधायक अब्बास अंसारी से मुलाकात हुई थी। दोनों की करीब डेढ़ घंटे चलने वाली बैठक जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट में हुई। मुलाकात के बाद अब्बास ने मीडिया से कोई बात नहीं की।
पार्टी की नजर RLD के दो मुस्लिम विधायकों गुलाम मोहम्मद और अशरफ अली खान पर भी है। ये दोनों 2022 में सपा-आरएलडी गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में जीते थे। सपा को उम्मीद है कि ये दोनों इस बार उनके पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।
आगे की रणनीति
अखिलेश ने बागी विधायकों को संदेश देते हुए कहा, “राज्यसभा चुनाव का समय मिलन का समय होता है.” उन्होंने आगे कहा, “अगर किसी को लगता है कि लोकतंत्र और संविधान पर हमला हो रहा है, तो कड़वी बातें भूलकर जो साथी साथ आना चाहते हैं, उनके साथ आने के लिए वह तैयार हैं.”
अखिलेश ने कांग्रेस से गठबंधन पर भी कहा, “जो गठबंधन पहले से था, जिसने बीजेपी को हराया था, समाजवादी पार्टी उसी गठबंधन को आगे बढ़ाने का काम करेगी.” पार्टी का अगला कदम उन विधायकों को मनाना और पुराने गठबंधन के रिश्तों को मजबूत करना रहेगा।
स्रोत: TV9 भारतवर्ष

