वाराणसी। शहर और आसपास के इलाकों में दो साल में बुजुर्गों को टार्गेट कर करीब 12 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। ठगों ने डिजिटल अरेस्ट और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसों के लिए बैंक खातों में आरटीजीएस कराए।
पुलिस के पास दर्ज मामलों में सिगरा क्षेत्र की रिटायर्ड शिक्षिका से 3.55 करोड़ रुपये की ठगी शामिल है। सारनाथ क्षेत्र के रिटायर्ड नौसेना अधिकारी को 22 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया और कुल 98 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए गए। लालपुर-पांडेयपुर की 67 साल की महिला से 32.40 लाख और रोहनिया के महेश प्रसाद से 1.10 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए गए। कोतवाली क्षेत्र की एक महिला से 81 लाख रुपये की ठगी की सूचना भी मिली है। कई आरोपियों को पकड़ा गया है और कुछ मामले अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े पाए गए हैं।
कानूनी पेंडेंसी और आंकड़े
पूर्वांचल की अदालतों में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े 1,15,441 मुकदमे लंबित हैं। नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के अनुसार जौनपुर में सबसे ज्यादा 22,109 मामले लंबित हैं, उसके बाद आजमगढ़ में 20,985 और गाजीपुर में 11,935 मामले हैं। वाराणसी में 9,313 मामले लंबित दर्ज हैं। कुल लंबित मामलों में सिविल मुकदमों की संख्या 95,738 (82.93%) और आपराधिक मामलों की संख्या 19,703 (17.07%) है।
पुलिस बताती है कि ठग अक्सर सीबीआई, ईडी, पुलिस और टेलीकॉम अधिकारियों का नाम लेकर वीडियो या कॉल पर दबाव बनाते हैं। कहीं भी किसी एजेंसी की ओर से ऑनलाइन या वीडियो पर पूछताछ नहीं होती।
शिकायत और बचाव के लिए पुलिस ने बुजुर्गों को सावधान रहने और तुरंत कार्रवाई करने की हिदायत दी है। नीचे दिए निर्देशों पर तुरंत अमल करने से रिकवरी की संभावना बढ़ती है।
- साइबर ठगी के एक से दो घंटे के अंदर शिकायत दर्ज कराएं।
- शिकायत दर्ज कराने के लिए 1930 पर संपर्क करें।
“ऑनलाइन या वीडियो पर किसी तरह की कोई भी एजेंसी पूछताछ नहीं करती है। संदेह होने पर तुरंत अपने नजदीकी थाने पर शिकायत दर्ज कराएं,”, नृपेंद्र कुमार, एडीसीपी साइबर क्राइम। स्थानीय पुलिस आगे की जांच कर रही है और लोगों से सतर्क रहने का आग्रह कर रही है।
स्रोत: अमर उजाला

