वाराणसी। इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर से आरंभ हो रहा है और पूरे 10 कैलेंडर दिनों तक चलेगा। काशी के विद्वान ज्योतिषियों ने कहा है कि इस बार अष्टमी की तिथि दो दिन रहने से नवरात्र की कुल अवधि एक दिन लंबी हो गई है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, बीते 50 वर्षों में यह केवल छठवीं बार है जब ऐसा दुर्लभ संयोग बना है। अष्टमी की तिथि एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के बाद तक समाप्त नहीं होती, इसलिए उसे लगातार दो दिन उदयातिथि माना जाता है।
तिथि और योग की जानकारी
ज्योतिषियों ने बताया कि इस बार अष्टमी की तिथि दो दिन पड़ने का कारण धार्मिक गणनाओं में आने वाला चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग है। इन शुक्रों के साथ मिलने से पारंपरिक रीति‑रिवाजों में लाभ माना जाता है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार ऐसे अवसरों पर विशेष पूजा, व्रत और पाठ का महत्व बढ़ जाता है। मंदिरों में शोभायात्रा, कलश स्वागत और गीत‑भजन की तैयारियाँ तेज होंगी। स्थानीय पंडित और पुजारी भी भक्तों को तिथि‑काल बताकर पूजा‑विधि समझा रहे हैं।
वाराणसी के कई स्थानों पर नवरात्र के दौरान माता के विशेष द्वार खोले जाते हैं और देवी की प्रतिमाओं की सजावट की जाएगी। बाजारों में माँ की मूर्ति, फूल, झंडे और प्रसाद की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
भक्तों के लिए सलाह है कि वे अपनी जगह‑विशेष के अनुसार पूजा‑पाठ का समय स्थानीय पंडितों से अवश्य確認 कर लें। शारदीय नवरात्र के दौरान धर्मिक आयोजनों की जानकारी के लिए अपने नजदीकी मंदिर से संपर्क रखा जा सकता है।
स्रोत: अमर उजाला

