मंडी धनौरा। दरबड़ ठेठ से शेरपुर तक बने तटबंध का काम 14 साल से अधूरा पड़ा है और खादर क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस वजह से फसल और रोजी-रोटी पर लगातार असर पड़ता है।
दरबड़ ठेठ से शेरपुर के बीच कुल करीब 15 किलोमीटर तटबंध के लिए पहले बसपा सरकार में 30 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। सपा शासन में काम शुरू हुआ, लेकिन बिजनौर के दरबड़ ठेठ-पपसरी खादर के बीच पांच किलोमीटर की जमीन देने से किसानों ने इंकार कर दिया और काम रुका।
बयान के अनुसार पांच किलोमीटर का अधूरा हिस्सा अब भी मौजूद है, जिसमें आधा किलोमीटर बिजनौर में और साढ़े चार किलोमीटर अमरोहा में है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि काम पूरा कराने के लिए करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये की और राशि चाहिए। सिंचाई विभाग शासन से धनराशि मांग रहा है।
ग्रामीणों की नाराजगी और नुकसान
तटबंध अधूरा रहने के कारण हर साल हजारों हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो जाती है और करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद होती है। कई परिवार जमीन बेचकर पलायन कर चुके हैं। पलायन करने वालों में बूटा सिंह, करनैल सिंह, सुखदेव सिंह, सरवन सिंह, सुखवीर सिंह जैसे नाम शामिल हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि मेहनत के बावजूद खेती हर साल नष्ट हो जाती थी और लागत भी नहीं निकलने की वजह से वे दुकानदारों के कर्जदार होते जा रहे थे। खादर क्षेत्र में रहने वाले सिख समुदाय के लोग भी बार-बार पलायन की बात करते हैं।
स्थानीय लोगों ने नेताओं पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। हरपाल सिंह और मनीराम सिंह ने कहा, “यह चुनाव में यह मुद्दा बनेगा।” अवतार सिंह ने कहा, “जब तक तटबंध का अधूरा पड़ा काम पूरा नहीं होता है। तब तक हर साल बाढ़ का दंश झेलना क्षेत्र के लोगों की मजबूरी बन चुकी है। सरकार को शीघ्र तटबंध का काम पूरा कराना चाहिए।”
आगे की कार्रवाई
एसडीएम धनौरा शैलेश कुमार दुबे ने कहा, “तटबंध के अधूरे पड़े निर्माण को पूरा करने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ वार्ता की जाएगी। वार्ता में किसानों से भूमि लेने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी। उम्मीद है कि शीघ्र ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा। तटबंध के अधूरे पड़े निर्माण को पूरा करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।”
स्रोत: अमर उजाला
