अमेठी। सोमवार को आशा व संगिनियों ने कलेक्ट्रेट और सीएमओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर अपनी कई मांगें रखीं और मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह व अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा गया। प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने वेतन, सुविधाएँ व दर्जा देने की प्रमुख माँगें उठाईं।
प्रदर्शनकारी नेताओं ने बताया कि जिले में करीब 1860 आशा और 92 संगिनियां स्वास्थ्य सेवाओं में काम कर रही हैं। आशा संगिनी संघ जिलाध्यक्ष कमलेश सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में आशा कार्यकर्ताओं को पदोन्नत करके संगिनी बनाया गया था, लेकिन अपेक्षित सुविधाएँ और मानदेय अब तक नहीं मिले हैं।
मांगें और्बिंदु
प्रदर्शन में प्रमुख मांगों में यह शामिल हैं:
- आशा संगिनियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देना।
- संगिनियों का मानदेय महीने के 24 दिन से बढ़ाकर 30 दिन का मानदेय देने की मांग।
- प्रति विजिट मिलने वाली राशि 300 रुपये से बढ़ाकर 700 रुपये करने का अनुरोध।
- मानदेय में हर वर्ष 20 प्रतिशत वृद्धि, सभी को मोबाइल उपलब्ध कराना और भुगतान कटौती की लिखित सूचना देने की मांग।
- किसी संगिनी की मृत्यु पर आश्रित को नौकरी और 10 लाख रुपये आर्थिक सहायता देना तथा आउटसोर्सिंग का दर्जा देना।
कमलेश सिंह ने कहा कि संगिनियां आशाओं के पर्यवेक्षण के लिए महीने में 24 दिन काम कर रही हैं और कई बार 40 किमी तक भ्रमण कर सुपरविजन करती हैं। उन्होंने अन्य विभागों के सुपरवाइजरों जैसी सुविधाएँ व सम्मानजनक वेतन दिए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रदर्शन के दौरान मिथिलेश, गीता मिश्रा, लवलेश, सुनीता, रेखा सिंह, सरिता, रामा देवी, रेनू सिंह, मीना, सरिता पाठक और अनुराधा आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के बाद सौंपे गए ज्ञापन पर अधिकारियों की कार्रवाई अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
आगे क्या होगा
कार्यकर्ता अधिकारियों से त्वरित जवाब की उम्मीद कर रहे हैं और यदि मांगों पर संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी व प्रशासन कौन सी कार्रवाई करेंगे, यह अगली प्रक्रिया के दौरान स्पष्ट होगा।
स्रोत: अमर उजाला

