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अमेठी: पितृ पक्ष में घर‑घर श्राद्ध, कौवे को भोजन देकर परंपरा निभाई जा रही

अमेठी में सुबह स्नान और पूजन के बाद पितरों के निमित्त भोजन तैयार कर छत या आंगन में रखा जाता है, कई परिवार कौवे की प्रतीक्षा करते हैं।

अमेठी: पितृ पक्ष में घर‑घर श्राद्ध, कौवे को भोजन देकर परंपरा निभाई जा रही
फोटो: अमर उजाला

अमेठी। पितृ पक्ष के मौके पर जिले में परिवार श्रद्धा और नियमों के साथ श्राद्ध और तर्पण कर रहे हैं। सुबह स्नान और पूजन के बाद पितरों के निमित्त विशेष भोजन बनाया जा रहा है और तर्पण कर श्रद्धा व्यक्त की जा रही है।

पूजन और श्राद्धकर्म पूरा होने पर भोजन का एक हिस्सा अलग रखा जाता है। इसे छत या आंगन में रखा जाता है क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार कौवा पितरों का प्रतीक होता है और उसके भोजन ग्रहण करने से अर्पण पितरों तक पहुंचता है। कई परिवार भोजन रखने के बाद कौवे के आने की प्रतीक्षा भी करते हैं।

परंपरा और विकल्प

आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण के साथ पितरों के निमित्त भोजन निकालने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में पेड़ों की संख्या घटने और शहरीकरण बढ़ने से कई जगह कौवे कम दिखाई देते हैं।

ऐसी स्थिति में श्रद्धालु पितरों के निमित्त तैयार भोजन गाय या कुत्ते को करा सकते हैं। अगर ये भी उपलब्ध न हों तो आचार्य ने सलाह दी है कि चींटियों को आटा या अन्न डालकर अर्पण किया जा सकता है ताकि परंपरा निभे और अर्पण का अर्थ पूरा हो।

श्रद्धालु राम सुफल ने बताया कि उनके परिवार में कौवे को भोजन खिलाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि यह रिवाज बच्चों और नई पीढ़ी को पूर्वजों के प्रति सम्मान और पितृ पक्ष की धार्मिक परंपराओं की जानकारी देता है।

अमेठी के घरों में परिवार मिलकर पूर्वजों का स्मरण कर रहे हैं और श्रद्धा से श्राद्धकर्म कर रहे हैं। कई लोग परंपरा के साथ आधुनिक परिस्थितियों के विकल्प अपनाकर भी धार्मिक कर्तव्यों का निर्वाह कर रहे हैं।

स्रोत: अमर उजाला

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Vikas Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।