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बलिया: इंदिरा गांधी को बुलाने मुंबई तक गए थे रामगोविंद चौधरी, छात्र राजनीति के अनकहे किस्से

1971-72 के छात्रसंघ आयोजनों में चौधरी ने चंद्रशेखर के पीछे मुंबई तक जाकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को बलिया आने का निमंत्रण पहुंचाने की कोशिश की।

बलिया: इंदिरा गांधी को बुलाने मुंबई तक गए थे रामगोविंद चौधरी, छात्र राजनीति के अनकहे किस्से
फोटो: प्रभात खबर

बलिया। रामगोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर सिर्फ आठ बार विधायक और उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक सीमित नहीं रहा। उनके सार्वजनिक जीवन के कई कम चर्चित प्रसंग उनके छात्र राजनीति के दिनों से जुड़े हैं।

छात्र जीवन में उनका सक्रिय होना 1971-72 के दौरान मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव से जुड़ा हुआ है। उस समय उनके साथी गौरीशंकर सिंह अध्यक्ष बने थे और छात्र नेता चाहते थे कि छात्रसंघ का उद्घाटन इंदिरा गांधी कराएं।

इंदिरा गांधी को बुलाने की कोशिश

इसी काम के सिलसिले में चौधरी ने समाजवादी नेता चंद्रशेखर से संपर्क किया। जब चंद्रशेखर मुंबई गए तो चौधरी भी उनके पीछे मुंबई तक पहुंच गए, ताकि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को बलिया आने का निमंत्रण पहुंचाया जा सके। यह घटना उनकी छात्र राजनीति के उस दौर को दर्शाती है जब कॉलेज के कार्यक्रमों के लिए भी राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुँचने की कोशिश की जाती थी।

बाद में उनका राजनीतिक रास्ता आंदोलनों की तरफ मुड़ा। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और आपातकाल के समय चौधरी गिरफ्तार हुए। जेल में रहने की अवधि को लेकर रिपोर्टों में मतभेद हैं—कुछ रिपोर्ट करीब 19 महीने बताती हैं, जबकि द प्रिंट पारिवारिक सूत्रों के हवाले से करीब 24 महीने का उल्लेख करती है।

उनकी रिहाई का समय भी एक दिलचस्प संयोग से जुड़ा बताया जाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बलिया जेल से उनकी रिहाई के दिन ही पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर बलिया लोकसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे, जो उनके राजनीतिक जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों में गिना जाता है।

विधायकी और विधानसभा में योगदान

रामगोविंद चौधरी 1977 में पहली बार चिलकहर विधानसभा सीट से विधायक बने। इसके बाद 1980, 1985, 1989 और 1991 में भी वे विधानसभा पहुंचे। बाद में बांसडीह उनका प्रमुख राजनीतिक केन्द्र रहा। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनके कुल आठ विधानसभा कार्यकाल दर्ज हैं।

चौधरी ने मुलायम सिंह यादव और बाद में अखिलेश यादव की सरकारों में मंत्री पद संभाला। 2017 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। रिकॉर्ड के अनुसार उनके नाम से 943 प्रश्न और 50 चर्चाएं दर्ज हैं।

रामगोविंद चौधरी के जीवन के ये किस्से यह बताते हैं कि उनकी राजनीति कॉलेज की छात्र राजनीति से शुरू होकर आंदोलनों और जेल के दौर से गुजरी और फिर लंबे समय तक विधानसभा का भाग बनती रही। आज उनके पार्थिव शरीर का अंतिम दर्शन बलिया के टीडी कॉलेज में होगा और पार्थिव शरीर शाम चार बजे पहुंचने की सूचना है।

स्रोत: प्रभात खबर

Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।