बरेली। रामपुर के शाहबाद क्षेत्र की जटपुरा गांव निवासी महताब ने अपनी मर्जी से सनातन धर्म अपनाकर मुरादाबाद के जागेशपुरी से हिंदू रीति‑रिवाज से शादी कर ली। अब वह ममता के नाम से जानी जाती हैं और शादी के बाद उन्होंने कहा कि वह घर वापस नहीं लौटेंगी।
युवती ने कहा, “मुझे अब अपने घर वापस नहीं जाना है. मैंने अपनी मर्जी से सनातन धर्म अपनाया और शादी की है. अब मैं इन्हीं के साथ पूरी जिंदगी रहूंगी.” उसने यह भी कहा कि उसने किसी दबाव, डर या लालच में यह फैसला नहीं लिया था और कि उसे हलाला और तीन तलाक से डर लगता था। “हिंदू धर्म अच्छा लगता है,” उसने जोड़ा।
भावनात्मक रिश्ते और परिवार की असहमति
महताब और जागेशपुरी की मुलाकात करीब चार साल पहले तब हुई जब जागेशपुरी उसके गांव में पुल और सरिया लगाने के काम पर मजदूरी कर रहा था। शुरुआत में बातचीत धीरे‑धीरे प्रेम में बदल गई। दोनों के बीच लगभग चार साल तक रिश्ता चलता रहा।
शादी का प्रस्ताव महताब ने खुद रखा और जागेशपुरी ने शादी के लिए हामी भर दी। दोनों ने परिवार से अनुमति लेने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने संबंध को मंजूरी नहीं दी। परिवार की नाराजगी के बाद दोनों ने मिलकर घर छोड़कर साथ रहने और विवाह करने का फैसला किया।
विवाह से पहले युवती का विधिवत शुद्धिकरण कराया गया। आचार्य केके शंखधार ने बताया कि गंगाजल और गोमूत्र से आचमन कराकर वैदिक मंत्रों और गायत्री मंत्र के जाप के साथ युवती को सनातन धर्म में दीक्षित किया गया।
शुद्धिकरण के बाद दोनों ने एक‑दूसरे को वरमाला पहनाई और हिंदू रीति‑रिवाज से सात फेरे लेकर साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया। ममता आठवीं कक्षा तक पढ़ी हैं। उनके पिता का नाम कासिम है और माँ मुजरमीन का देहांत हो चुका है। परिवार में तीन भाई और तीन बहनें हैं।
जागेशपुरी मुरादाबाद के मूंढापांडे थाना क्षेत्र के रोंडा गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता सोनपुरी खेती‑किसानी करते हैं। अब दंपति साथ रहकर अपना घर बसाने की योजना रखता है और ममता ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका घर वापस लौटने का कोई इरादा नहीं है।
स्रोत: TV9 भारतवर्ष

