बरेली। शहर में रेलवे की सैकड़ों एकड़ जमीन पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। इज्जतनगर से श्यामगंज मालगोदाम तक पुरानी पूर्वोत्तर रेलवे की मीटर गेज लाइन कई हिस्सों में नजर नहीं आ रही है।
रेलवे के अनुसार इज्जतनगर-श्यामगंज रेल लाइन कुल 19.33 एकड़ से अधिक भूमि पर फैली हुई थी, लेकिन अब यह लाइन कुछ ही स्थानों पर स्पष्ट दिखती है। कई जगहों पर स्थायी व अस्थायी निर्माण हो चुके हैं और बीच-बीच में चलाए गए छिटपुट अभियान भी असर नहीं दिखा पाए।
सर्वे से चिह्नित होगा कब्जा
अब रेलवे अतिक्रमण की पहचान के लिए ड्रोन कैमरों से सर्वे कराएगा। साथ में सेटेलाइट इमेजरी की मदद भी ली जाएगी ताकि जमीन के वास्तविक सीमांकन का पैमाना तैयार हो सके। सर्वे के बाद उन हिस्सों को चिह्नित करके कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) ने शहर की कुछ जमीनें निजी कंपनियों को लीज पर भी दी हैं। उदाहरण के तौर पर राजश्री ने 15,394.23 वर्गमीटर पर और श्यामगंज में नरेंद्र देव इंफ्रा ने 46,396.22 वर्गमीटर पर आवासीय व व्यावसायिक परियोजनाओं का काम शुरू कर दिया है।
सीबीगंज और इज्जतनगर के कई हिस्सों में भी रेलवे जमीनों पर अवैध निर्माण और धार्मिक स्थल बन चुके हैं। इन निर्माणों को लेकर पहले भी तनातनी की स्थिति बन चुकी है और कई बार विवाद सुलझाने के प्रयास हुए हैं।
आगे की कार्रवाई और लोगों के लिए असर
सर्वे पूरा होने के बाद रेलवे के पास कब्जेदारों को हटाने और जमीन पर अपना अधिकार स्थापित करने का ठोस नक्शा होगा। निकट भविष्य में चिन्हित हिस्सों पर कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं। स्थानीय निवासी और व्यवसायी जिन्हें जमीन विकास या निर्माण के नाम पर दिया गया है, उन्हें आरएलडीए या रेलवे से सीधे जानकारी लेनी चाहिए।
स्रोत: अमर उजाला

