भदोही। शनिवार को जिले में माताओं ने आस्था के साथ जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) का पर्व मनाया। महिलाएँ निर्जला व्रत रखकर अपने बच्चों की सेहत, खुशहाली और दीर्घायु की कामना लेकर नदी-तालाबों और घरों से मंदिरों की ओर निकलीं।
सुजातपुर निवासी आचार्य शरद पांडेय ने बताया कि अश्विन माह की अष्टमी के दिन सुबह स्नान करके माताओं ने व्रत शुरू किया। दिनभर परिवार मिलकर पूजा-अर्चना और व्रत की तैयारी करते रहे। शाम चार बजे के बाद फल, फूल और पूजन सामग्री से सजी डलिया लेकर व्रती महिलाएं और उनके परिजन गाजे-बाजे के साथ मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
मुख्य पूजा स्थल और कार्यक्रम
जिले के कई प्रमुख मंदिरों में देर शाम तक व्रती महिलाओं ने कथा सुनी और पूजा पूरी की। इन मंदिरों में गोपीगंज के बाबा बड़े शिव मंदिर, हनुमानगढ़ी मंदिर, कबूतरनाथ, गोपेश्वरनाथ, जोगीबीर महादेव और हनुमानगढ़ के काली मंदिर शामिल थे। इसके अलावा खमरिया के मधईपुर, चौरा माता मंदिर, खलवापुर कुटिया, अकबरपुर के बगीचा मुहल्ला के पास शिव मंदिर, बाबूसराय, सुरियावां, ज्ञानपुर, मोढ़ और चौरी जैसे स्थानों पर भी व्रत और पूजा संपन्न हुई।
पूजा स्थलों पर ग्रामीणों ने दो दिन पहले से ही तैयारियाँ की थीं। व्रत के बाद महिलाएँ कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक कार्यक्रम में भागीदार बनीं।
सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक नियंत्रण का विशेष ख्याल रखा गया। पुलिसकर्मी मुख्य मार्गों तथा मंदिरों के पास चक्रमण करते रहे और लोगों से शांतिपूर्ण ढंग से पूजा करने की अपील की। कुछ प्रमुख स्थानों पर व्रती महिलाएँ मंदिरों की ओर जाने पर करीब आधे घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही।
आगे की परिस्थितियाँ
जिले भर में जीवित्पुत्रिका पर्व शांतिपूर्ण तरीके से मनाया गया और पूजा के बाद आसपास के इलाकों में संध्या की शांति बनी रही। प्रशासन ने कहा कि भविष्य में भी त्योहारी आयोजनों के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन बनाए रखा जाएगा।
स्रोत: अमर उजाला

