फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से भेजी गई धनराशि बिना व्यय आदेश के ही खर्च कर दी। निदेशालय ने भेजी गई रकम वापस करने का आदेश दिया है और इससे विभाग में खलबली मची है।
एनएचएम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में जांच सामग्री खरीद के लिए कुल 68 लाख 416 रुपये भेजे थे। इसके अंतर्गत 2,82,752 रुपये प्रति आरोग्य मंदिर के हिसाब से 48 लाख 6784 रुपये 17 नगरीय आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को भेजे गए थे। वहीं शहर के छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 3,32,272 रुपये के हिसाब से 19,93,632 रुपये भेजे गए थे।
निदेशालय का आदेश और कारण
निदेशालय ने धनराशि भेजते समय स्पष्ट शर्त रखी थी कि व्यय आदेश मिलने के बाद ही सामग्री खरीदी जाए। हालांकि विभागीय जिम्मेदारों ने व्यय आदेश का इंतजार किए बिना ठेकेदारों के माध्यम से खरीद करवा ली और भुगतान कर दिया। इससे मिलने वाली वस्तुएं और खरीद का लेखा-जोखा फाइनल नहीं है।
23 सितंबर को एनएचएम की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोयल ने सीएमओ को पत्र जारी कर धनराशि वापस करने के निर्देश दिए। पत्र में लिखा था कि आवंटन के दौरान भेजे गए पत्र के अनुरूप ही व्यय आदेश मिलने के बाद धनराशि खर्च की जानी थी, अन्यथा सीएमओ व स्टोर प्रभारी जिम्मेदार होंगे। मिशन निदेशक ने एक सप्ताह के अंदर धनराशि सरेंडर करने का आदेश दिया है।
जिले में 17 आयुष्मान आरोग्य मंदिर बताए जा रहे हैं, जिनमें शहर के 12 और कस्बों के पांच केंद्र शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया कि किसी भी आरोग्य मंदिर में एलटी व फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है और कई केंद्रों में डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में भेजी गई जांच सामग्री का उपयोग सीमित रहा होगा।
सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि वह अवकाश से लौटे हैं। मिशन निदेशक का पत्र देखने के बाद विभाग यह तय करेगा कि धनराशि कैसे और किस प्रक्रिया के तहत लौटाई जाए और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

