गाज़ियाबाद। मधुबन बापूधाम योजना से जुड़े विवाद में स्थायी लोक अदालत ने गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) को परिवादी अतर सिंह की जमा धनराशि में से 31,23,000 रुपये वापस करने का आदेश दिया है। अदालत ने साथ ही इस राशि पर वाद दायर करने की तिथि से भुगतान होने तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के भी निर्देश दिए हैं।
यह आदेश स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष रीता सिंह की पीठ ने जारी किया। अदालत को दिए विवरण के अनुसार अतर सिंह ने मधुबन बापूधाम योजना में आवंटित भवन के लिए जीडीए में कुल 34,70,000 रुपये जमा किए थे। मामले की सुनवाई में अदालत ने आवंटन राशि में कुल 10 प्रतिशत यानी 3,47,000 रुपये काटे।
अदालत का फैसला और दावे
कटौती के बाद शेष राशि 31,23,000 रुपये परिवादी को लौटाने का आदेश दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उक्त राशि पर वाद दायर करने की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज देनी होगी। अदालत ने जीडीए को निर्देश दिए हैं कि तय समय में भुगतान करें।
मामले में परिवादी की ओर से मानसिक और शारीरिक क्षति के लिए पांच लाख रुपये की मांग भी की गई थी। स्थायी लोक अदालत ने इस मुआवजे के दावे को स्वीकार नहीं किया और इसे खारिज कर दिया। आदेश में यह बात स्पष्ट रूप से दर्ज है कि पांच लाख रुपये का दावा मान्य नहीं है।
उच्च न्यायिक आदेश के बाद अब जीडीए को निर्धारित अवधि में राशि और देय ब्याज का भुगतान करना होगा। आदेश के अनुसार जीडीए को एक माह की अवधि में भुगतान करना अनिवार्य होगा वरना आगे की कानूनी कार्रवाई संभव है।
स्थानीय आवेदकों और योजना से जुड़े हितधारकों के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है। जिन निवेशकों ने मधुबन बापूधाम योजना में पैसा लगाया है, उन्हें यह आदेश अपना ध्यान रखने का संकेत देता है। आगे की प्रक्रिया के संबंध में जीडीए की तरफ से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
स्रोत: अमर उजाला

