हरदोई। बैराजों से छोड़े गए पानी ने बिलग्राम, हरियावां और भरावन के कई गांवों में तबाही मचा दी है। नदी और नालों के उफान से जलजमाव की स्थितियां बन गई हैं और लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी नहीं चला पा रहे हैं।
इधर सबसे ज्यादा असर और संख्या
बिलग्राम क्षेत्र के जरसेनामऊ से तिरवा कुल्ली तक पूरा इलाका पानी से भरा हुआ है। तीन हजार बीघा से अधिक फसलें प्रभावित बताई जा रही हैं। गंगा और गर्रा नदी के बढ़े पानी ने आसपास के खेतों को नुकसान पहुंचाया है। बिलग्राम-कन्नौज मार्ग पर जरसेनामऊ से लेकर तेरावकुल्ली के आगे करीब 12 किलोमीटर तक पानी ही पानी दिख रहा है।
प्रभावित गांव और सेवाओं पर असर
राजघाट के आसपास कटरी इलाकों में छिबरामऊ, कटरी छिबरामऊ, कटरी जरसेनामऊ, कटरी बिलुही, कटरी महादेवा, कटरी बिछुईया और कटरी महादेवा समेत कई गांव बाढ़ से बेहाल हैं। जरेला, पुन्नापुरवा और मदारीपुरवा में भी पानी भरा हुआ है और आवागमन नाव से हो रहा है। बिजली आपूर्ति ठप हो गई है और कई स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
हरियावां क्षेत्र में सई नदी के तेज बहाव से छह गांव प्रभावित हुए हैं। जतुली और शर्माखेड़ा गांवों में सबसे अधिक परेशानी है। शाहपुर से कसियापुर जाने वाली सड़क पर चार फीट पानी आ गया है और चिरैयाझाला से शाहपुर मार्ग पर तीन से चार फीट पानी के कारण आवागमन ठप है। जलभराव से धान, उर्द, तिल्ली और मक्का की फसलें खराब हो रही हैं।
भरावन ब्लॉक की ग्राम पंचायत गोंडवा के मजरा नहोइया में लगभग 300 की आबादी जलभराव से जूझ रही है। गांव से बाहर जाने वाला 500 मीटर कच्चा रास्ता तीन फीट तक जलमग्न है और ग्रामीण कमर तक पानी पार कर रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है और अस्पताल के आसपास का मार्ग भी डूब गया है।
राहत और निगरानी के काम चल रहे हैं। एसडीएम एन राम और तहसीलदार दीपक गौतम ने बताया कि राजस्व टीमों से सर्वे कराया जा रहा है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कराई जा रही है। गर्रा नदी के पानी से चुन्नीपुरवा और तिलमई खेड़ा में नायब तहसीलदार ने पीड़ितों के लिए व्यवस्था कराई है। बीडीओ अरविंद कुमार ने कहा कि नहोइया गांव की समस्या की जानकारी है और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोंडवा का निर्माण चल रहा है; जलभराव का समाधान कराया जाएगा।
स्थानीय लोग राहत किट, सुरक्षित पेयजल और बिजली बहाल करने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने सर्वे और राहत कार्य तेज कर दिए हैं ताकि आवागमन और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम किए जा सकें।
स्रोत: अमर उजाला

