हरदोई। वेतनमान व भत्तों में बढ़ोतरी न होने के विरोध में लेखपालों ने शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस सहित कार्यबहिष्कार किया और अपनी-अपनी तहसीलों में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंप दिया।
आक्रोशित लेखपालों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि परिषद, शासन और सरकार उनकी दशकों पुरानी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं ले रही है। लेखपाल संघ के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष राहुल सिंह और मंत्री संजीव यादव ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
मांगें और पुराने बिन्दु
लेखपालों ने बताया कि वे पिछले 10 साल से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वह प्रारंभिक वेतनमान 2,800 ग्रेडपे और वेतन विसंगति दूर करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा आठ साल से अंतर मंडलीय स्थानांतरण नहीं हुआ है, दो साल से पदोन्नति सूची नहीं आई और 16 साल से भत्ते में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
प्रदर्शन के दौरान लेखपाल संघ की जिला इकाई व तहसील शाखा के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लेखपाल मौजूद रहे। संघ ने शासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की और चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन को तेज किया जाएगा।
लेखपालों के कार्य बहिष्कार का असर सीधे लोगों पर पड़ा। तहसीलों में खसरा की नकल जारी नहीं की जा सकी जबकि खतौनी किसानों ने ऑनलाइन प्राप्त कर ली। वहीं आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदनों पर लेखपालों ने रिपोर्ट नहीं लगाई।
स्थानीय लोगों ने कहा कि जरूरी दस्तावेजों और रिपोर्टों में कम से कम एक दिन की देरी हुई है और कुछ ग्रामीणों को खेत या बैंक संबंधी कार्यों में परेशानी उठानी पड़ी। शासन या जिला प्रशासन की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर उन्हें कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
अब देखना होगा कि प्रशासन किस तरह मौके पर हस्तक्षेप कर समाधान कराता है। लेखपाल संघ ने संकेत दिए हैं कि उनकी मांगों पर संतोषजनक जवाब मिलने तक विरोध जारी रहेगा।
स्रोत: अमर उजाला

