लखनऊ। अक्तूबर आ चुका है और ठंड की पहली लहर शुरू हो रही है। इस मौसम में कई लोग अपनी इनवर्टर बैट्री की हालत को लेकर चिंतित दिखते हैं। ठंड से बैट्री की क्षमता घट सकती है और बैकअप कम मिलने लगता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड में बैट्री के अंदर होने वाली रासायनिक प्रक्रियाएँ धीरे हो जाती हैं। इससे न केवल बैकअप समय घटता है बल्कि बैट्री जल्दी खराब होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए मौसम बदलते ही कुछ आसान देखभाल काम करने चाहिए।
मौलिक देखभाल के कदम
सबसे पहले बैट्री के टर्मिनल्स की नियमित सफाई और ग्रीसिंग जरूरी है। टर्मिनल पर जमा धूल और जंग संपर्क को कमजोर कर देते हैं, जिससे चार्जिंग प्रभावी नहीं रहती। टर्मिनल साफ करने के बाद हल्का सा ग्रीस लगाने से संपर्क बेहतर रहता है और करंट का नुकसान कम होता है।
डिस्टिल्ड वॉटर का प्रयोग भी महत्वपूर्ण है। बैट्री में पानी का स्तर समय के साथ घटता है; बिना डिस्टिल्ड वॉटर के खारे पानी से बैट्री की केमिस्ट्री प्रभावित हो सकती है। इसलिए संकेत के अनुसार निर्धारित लेवल पर ही डिस्टिल्ड वॉटर भरें और सामान्य पानी का इस्तेमाल न करें।
चार्जिंग का समय और तरीका भी मायने रखता है। ठंड के दिनों में बैट्री को नियमित रूप से समय पर चार्ज करना चाहिए ताकि सेल्स पूरी तरह सक्रिय रहें। लंबे समय तक डिस्चार्ज छोड़ देने से बैट्री की क्षमता स्थायी रूप से घट सकती है।
इसके अलावा बैट्री को ऐसे स्थान पर रखें जहाँ बहुत ठंड या सीधी धूप न लगे। घर के अंदर गर्म और सूखी जगह बैट्री के लिए बेहतर होती है। नियमित निरीक्षण और छोटे-मोटे मेन्टेनेंस से आप बैट्री की उम्र बढ़ा सकते हैं और आकस्मिक बिजली कट के समय बेहतर बैकअप पा सकते हैं।
आगे क्या करें
अब जब ठंड बढ़ रही है तो इन सुझावों को अपनाना शुरू कर दें। बैट्री से जुड़ी कोई भी अनियमितता दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। नियमित सफाई, सही पानी और समय पर चार्जिंग से खर्चे भी घटेंगे और बैट्री का जीवन बढ़ेगा।
स्रोत: अमर उजाला

