सिद्धार्थनगर। अप्रैल के पहले हफ्ते में आए तेज हवा-बारिश ने बस्ती मंडल के बागानों में चिंता बढ़ा दी है। मौसम के इस अचानक बदलने से बौर से टिकोरा बनने की संवेदनशील प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
मंडल के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश के बाद बागों में कच्चे आम और बौर के झड़ने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। नौगढ़ क्षेत्र के बड़े बागबान जमशेद खान बताते हैं कि इस मौसम की वजह से 10 से 20 प्रतिशत तक बौर और टिकोरा गिरने का अनुमान है।
फसल पर असर के कारण
उद्यान विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी से अप्रैल का दौर आम के लिए निर्णायक होता है जब फूल से फल बनने की प्रक्रिया चलती है। तेज हवा परागण को बाधित करती है और बारिश से नमी बढ़ने पर फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
इन असरों का सीधा नतीजा फल बनने और टिकने की क्षमता पर पड़ता है। मंडल में आम का रकबा सीमित होने के बावजूद संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर के कई गांवों में बागवानी किसानों की आय का महत्वपूर्ण जरिया है।
पिछले कुछ वर्षों में मौसम का अनिश्चित पैटर्न बढ़ा है और मार्च-अप्रैल में अचानक आंधी या बारिश की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक दर्ज की जा रही हैं। इससे उत्पादन के पैटर्न में अस्थिरता आई है और किसानों की आमदनी प्रभावित होने की आशंका है।
किसान स्थानीय उपाय और सावधानी बरतने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक बदलता मौसम योजना बनाने में मुश्किल पैदा कर रहा है। अधिकारियों से स्थिति की निगरानी और बचाव के सुझावों की उम्मीद की जा रही है।
आगे क्या होगा: बागबानों और कृषि विभाग को मौसम के अनुरूप सलाह और फंगल रोगों से बचाव के उपायों पर काम तेज करना होगा। प्रभावित किसानों को उपलब्ध समर्थन और मार्गदर्शन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
स्रोत: अमर उजाला

